नीट परीक्षा विवाद : भिवानी में कांग्रेस की पत्रकार वार्ता आयोजित, बोला सरकार पर तीखा हमला
देश की शिक्षा बजट से अधिक बच्चों के अभिभावकों का कोचिंग पर होता है खर्च : कांग्रेस नेता
भिवानी, 22 जून : देश भर में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली नीट परीक्षा भले ही संपन्न हो चुकी हो, लेकिन इसे लेकर मचा राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को स्थानीय जैन चौक स्थित तिलक भवन में कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी और शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया जोगी ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता बुलाई। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने नीट परीक्षा में हुई कथित धांधलियों और पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग की।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए दोनों जिला अध्यक्षों ने परीक्षा के आयोजन के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट परीक्षा के आयोजन और प्रश्नपत्रों को लाने-ले जाने के लिए जिस तरह से भारतीय वायुसेना की मदद लेनी पड़ी, वह इस बात का सीधा प्रमाण है कि देश का नागरिक प्रशासनिक और शिक्षा ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति देश के शिक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाती है, क्योंकि सरकार एक पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रही है।
ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी व शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया जोगी ने कहा कि नीट परीक्षा में हुए कथित घोटालों और पेपर लीक की खबरों ने देश के लाखों प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अनिश्चितता और मानसिक तनाव के कारण देश के कई होनहार छात्रों को आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है, जिसकी पूरी नैतिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी चाहिए।
नेताओं ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया कोटा दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने कोटा में कोचिंग ले रहे परीक्षार्थियों के बीच जाकर उनकी जमीनी आवाज को उठाया है। आज देश में हालात यह है कि देश के कुल शिक्षा बजट से कहीं अधिक पैसा गरीब और मध्यमवर्गीय अभिभावकों को अपने बच्चों की कोचिंग पर खर्च करना पड़ रहा है। यह वर्तमान शिक्षा प्रणाली के खोखलेपन को उजागर करता है और इस पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर चौतरफा हमला बोलते हुए कहा कि देश में नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने तर्क दिया कि आठवीं कक्षा से ही बोर्ड परीक्षाओं का दबाव बनाने से बच्चों का स्वाभाविक टैलेंट दब रहा है और वे सिर्फ परीक्षाओं के बोझ तले दबते जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने रोजगार और देश की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार का निवेश ऐसी जगहों पर हो रहा है, जहां श्रम (लेबर) आधारित उद्योग विकसित नहीं हो रहे, जिससे देश में बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। सरकार की मौजूदा आर्थिक नीतियों से कागजों या आंकड़ों में भले ही अल्पकालिक सुधार दिखाई दे, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह युवाओं के भविष्य और देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।
राजनीतिक हमलों के बीच, ग्रामीण जिला अध्यक्ष व शहरी जिला अध्यक्ष ने परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश और प्रदेश के युवाओं से एक बेहद भावुक और महत्वपूर्ण अपील भी की। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे परीक्षाओं के लिए कड़ी मेहनत जरूर करें, लेकिन अत्यधिक मानसिक तनाव से दूर रहें। उन्होंने कहा कि आत्महत्या जैसा कदम न केवल एक जीवन को समाप्त करता है, बल्कि पूरे परिवार को जीवनभर के असहनीय दर्द से पीडि़त कर देता है। युवाओं को तनाव मुक्त होकर परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए और जीवन के अन्य सकारात्मक पहलुओं पर भी गौर करना चाहिए।
इस अवसर पर ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश कौशिक, दिलबाग सिंह, सतबीर सत्तु, जोगेंद्र ग्रेवाल, देवराज महता, नरेश तंवर जीएम, ईश्वर शर्मा प्रधान, प्रताप सरपंच संजीव जागलान, कर्ण सिंह गोठड़ा, विरेंद्र बापोड़ा, शिव कुमार चांगिया, कमल सिंह सेवादल जिला प्रधान, रजत कांगड़ा युवा हल्का अध्यक्ष बलवान पार्षद, रणदीप हुड्डा, अशोक ढ़ोला, प्रवीण बूरा, सुमित बराड़, संदीप, कुलदीप कैरू, बलबीर सरोहा, कैप्टन रामेहर जांगड़ा, विजेंद्र फौजी, पुनीत नुनीवाल, महेंद्र पाल यादव, महेंद्र बिधनोई, कृष्ण प्रजापत, डा. फूल सिंह धनाना, श्यामलाल चारण, नारायण दत्त, रवि सोलंकी, रमेश ढिक़ाव, अनिल वाल्मीकि, धीरज टिकानिया, तरूण कुमार, शिव कुमार धानक, रविकांत, सुनील शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।