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प्रदेश में निर्माण एवं विकास परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य: डीसी
 

- नियमों की पालना नहीं करने पर होगी कार्रवाई
- 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्र की सभी निर्माण परियोजनाओं को डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण, स्वयं मूल्यांकन, लाइव स्ट्रीमिंग कैमरे और एंटी स्मॉग गन संबंधी नियमों की करनी होगी पालना
 

भिवानी, 04 जुलाई।  डीसी साहिल गुप्ता ने बताया कि हरियाणा में निर्माण एवं विकास गतिविधियों से जुड़े सभी परियोजना प्रस्तावकों, फैक्ट्रियों, बिल्डरों, कॉलोनाइजरों तथा वाणिज्यिक उपक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन एवं स्वयं-मूल्यांकन (सेल्फ असेसमेंट) के लिए निर्धारित वेब पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। डीसी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा को निर्देश दिए हैं कि वे निर्देशों की पालना करवाना सुनिश्चित करें।
डीसी ने बताया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से आयोग के 11 जून 2021 के निर्देशों की अनुपालना में निर्माण परियोजनाओं के लिए श्वठ्ठ1द्बह्म्शठ्ठद्वद्गठ्ठह्लड्डद्य ष्ठह्वह्यह्ल स्द्गद्यद्घ ्रह्यह्यद्गह्यह्यद्वद्गठ्ठह्ल क्कशह्म्ह्लड्डद्य ([द्धह्लह्लश्च://स्रह्वह्यह्लड्डश्चश्च.द्धह्यश्चष्ड्ढ.शह्म्द्द.द्बठ्ठ](द्धह्लह्लश्च://स्रह्वह्यह्लड्डश्चश्च.द्धह्यश्चष्ड्ढ.शह्म्द्द.द्बठ्ठ)) विकसित किया गया है। सभी पात्र परियोजना प्रस्तावकों को इस पोर्टल पर स्वयं प्रदूषण मूल्यांकन एवं धूल नियंत्रण संबंधी जानकारी ऑनलाइन भरना अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल पर प्रस्तावित अथवा संचालित सभी मौजूदा एवं आगामी निर्माण और विकास परियोजनाओं को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इस वेब पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। केवल एनएचएआई की राजमार्ग परियोजनाओं को इस व्यवस्था से छूट दी गई है।
उन्होंने बताया कि आवेदन करने वाले परियोजना प्रस्तावक अथवा निर्माण एजेंसी को अपनी गतिविधियों का स्वयं निरीक्षण एवं स्वयं परीक्षण करना होगा। निरीक्षण के दौरान यदि किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो उसका तत्काल सुधार सुनिश्चित करना भी संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी होगी। साथ ही पोर्टल पर निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण गतिविधियों का समय-समय पर स्वयं ऑडिट, निरीक्षण तथा स्वयं मूल्यांकन अपडेट करना भी अनिवार्य रहेगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने बताया कि 2.5 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल तथा 10 लाख रुपये या उससे अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं में वेब पोर्टल के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो कैमरे स्थापित करना भी आवश्यक होगा, ताकि निर्माण गतिविधियों की निगरानी की जा सके।
उन्होंने कहा कि धूल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 5000 वर्ग मीटर या उससे अधिक प्लॉट क्षेत्र अथवा 10000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली परियोजनाओं में एंटी स्मॉग गन लगाना अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक 5000 वर्ग मीटर क्षेत्र के लिए कम से कम एक अथवा आवश्यकता अनुसार एक से अधिक एंटी स्मॉग गन का उपयोग करना होगा।
क्षेत्रीय अधिकारी ने सभी परियोजना प्रस्तावकों, फैक्ट्री संचालकों, बिल्डरों, कॉलोनाइजरों एवं वाणिज्यिक संस्थानों से अपील की कि वे निर्माण एवं विकास गतिविधियां शुरू करने से पहले निर्धारित पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण करवाएं तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित सभी पर्यावरणीय एवं धूल नियंत्रण मानकों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करें। इससे वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। निर्देशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।