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ठगी पीडि़तों का फूटा गुस्सा : देशव्यापी भुगतान चेतावनी दिवस पर सरकार को ललकारा
 

राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह के तहत चीटफंड पीडि़त निशकों ने रोया दुखड़ा, प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
 
 

7 वर्ष बाद भी पीडि़त निवेशकों को फूटी कौड़ी ना मिलना कानून का उल्लंघन व निवेशकों के साथ क्रर मजाक : रामजस
31 जुलाई को देश भर के पीडि़त निवेशक नई दिल्ली में संसद भवन का करेंगे घेराव : प्रदेश अध्यक्ष रामजस


भिवानी, 21 मई : पीएसीएल, राष्ट्रीय सहारा, किम फ्यूचर विजन, नेक्टर कर्मिशियल, गौपैथी स्वदेशी उद्योग, आदर्श सोसायटी सर्वहित हाऊसिंग लिमिटेड, विनायक होम सहित अन्य चीटफंड कंपनियों के पीडि़त निवेशकों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। ठगी पीडि़त जमाकर्ता परिवार (तपजप) के बैनर तले वीरवार को पूरे देश में भुगतान चेतावनी दिवस मनाया गया। इस राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह के तहत देश के विभिन्न जिलों और तहसीलों में ठगी पीडि़तों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक खुला रोषात्मक ज्ञापन सौंपा। इसी कड़ी में भिवानी में यह भी प्रदर्शन तपजप के बैनर तले किया गया। इस दौरान पीडि़त निवेशकों ने सीधे शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है भुगतान करो या सत्ता छोड़ो, ठग बेईमानों भारत छोड़ो। प्रदर्शन से पूर्व पीडि़त निवेशकों की बैठक स्थानीय चौ. सुरेंद्र सिंह पार्क में हुई, जिसकी अध्यक्षता तपजप के प्रदेश अध्यक्ष रामजस ने की तथा संचालन जिला अध्यक्ष रमेश तंवर ने किया। इसके उपरांत पीडि़त निवेशक प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे तथा बड्स एक्ट भिवानी के सक्षम अधिकारी व पुलिस अधीक्षक के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्र के नाम मांगपत्र सौंपा।
      सत्याग्रह और ज्ञापन प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रामजस ने सरकार और लचर प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह देश के लोकतंत्र और संसद का सबसे बड़ा अपमान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में देश की संसद ने सर्वसम्मति से अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी अधिनियम 2019 (बड्स एक्ट-2019) पास किया था। इस कानून के तहत ठगी पीडि़त परिवारों को उनके निवेश का दो से तीन गुना भुगतान 180 दिनों के भीतर करने की कानूनी गारंटी दी गई थी। लेकिन आज इस टाइम-बाउंड एक्ट को बने पूरे 7 साल होने को आए है और राज्य सरकारों ने किसी भी पीडि़त को एक फूटी कौड़ी तक वापस नहीं दिलाई है। यह कानून का खुला उल्लंघन और देश के करोड़ों गरीब जमाकर्ताओं के साथ क्रूर मजाक है।
       प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष रमेश तंवर ने कहा कि सरकार और प्रशासन ने पीडि़तों को न्याय देने के बजाय भटकाने का काम किया है। सेबी और सीआरसीएस जैसे जो गैर-कानूनी रिफंड पोर्टल खोले गए हैं, वे पूरी तरह से विफल और भ्रामक हैं। इन्हें तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। इसके अलावा, कोऑपरेटिव सोसायटियों पर जो लिक्विडेटर (परिसमापक) नियुक्त किए गए हैं, उन्हें जनता के पैसे से भारी-भरकम वेतन-भत्ते देना तुरंत बंद किया जाए। हमारी साफ मांग है कि हर जिले और तहसील स्तर पर भुगतान पटल (काउंटर) स्थापित किया जाए और जिला प्रशासन स्वयं बड्स एक्ट-2019 के प्रावधानों के तहत पीडि़तों का पैसा ब्याज और मैच्योरिटी राशि समेत वापस करे।
      उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि यदि सरकार ने इस न्यायपूर्ण मांग को तुरंत स्वीकार नहीं किया तो आंदोलन को ऐतिहासिक रूप दिया जाएगा तथा 31 जुलाई को बड्स एक्ट के 7 साल पूरे होने के अवसर पर देश के 100 करोड़ से ज्यादा ठगी पीडि़त और उनके परिजन सुबह 10 बजे देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद भवन का घेराव करेंगे। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह घेराव पूरी तरह से अहिंसक सत्याग्रह के मार्ग पर होगा, जहां सीधे तौर पर प्रधानमंत्री से भुगतान या गद्दी छोडऩे का हिसाब मांगा जाएगा।
     इस अवसर पर राजेश बडाला, पवन कुमार सिरसा घोघड़ा, बलबीर, कृष्ण, सुरेश कुमार, वजीर, मुकेश, उमेद रानिला, राजबीर, हरीश कुमार, सतपाल फौजी, सूबे सिंह, विजय रोहिल्ला, सुरेश अलखपुरा, सुखबीर सिंह, शीला देवी, गुड्डी सहित अन्य पीडि़त निवेशक मौजूद रहे।