कृषि शिविर में ग्वार विशेषज्ञ डा. बी.डी. यादव ने दिए पैदावार बढ़ाने के गुरुमंत्र
बिजाई से पहले मिट्टी की जांच करवाएं किसान व संतुलित खाद का प्रयोग करें : डा. बीडी यादव
Jun 7, 2026, 17:13 IST
भिवानी, 07 जून : भिवानी जिले के खंड बहल के गांव सिधनवा में ग्वार फसल पर कृषि विभाग के तत्वावधान में ग्वार विशेषज्ञ डा. बी.डी. यादव के सहयोग से ग्वार फसल की पैदावार बढ़ाने पर शिविर का आयोजन एटीएम डा. मदन सिंह की देखरेख में किया गया। ग्वार विशेषज्ञ डा. बी.डी. यादव ने किसानों को खेत की मिट्टी के सैम्पल लेने के तरीके के बारे में अवगत कराया तथा उसे नजदीकी प्रयोगशाला में टेस्ट करवाने की सलाह दी। मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है। इसके अलावा उन्होंने ने किसानों को अपने खेत में गोबर की तैयार खाद डालने का विशेष जोर दिया। इससे मृदा की उर्रवाशक्ति बढ़ती है। मिट्टी जांच के बाद ही संतुलित खाद का प्रयोग करें।
गोष्ठी में किसानों से रूबरू होने पर पता चला किसानों को जडग़लन व झुलसा रोग की रोकथाम के बारे में बहुत कम जानकारी है इसलिए इस तरह की ट्रेनिंग करना किसान के बहुत ही हित में है। ग्वार विशेषज्ञ डा. बीडी यादव ने ग्वार की कम पैदावार होने का जडग़लन व झुलसा रोग मुख्य कारण बताए। डा. यादव ने बताया कि उखेड़ा बीमारी के जीवाणु जमीन में पनपते हैं व ग्वार के उगते हुए पौधों की जड़ों को काला कर देते हैं। जिससे पौधें जमीन से नमी व खुराक लेना बंद कर देते हैं। इस कारण पौधें मुरझाकर पीले हो कर मर जाते हैं। ऐसे पौधों को जब जमीन से उखाड़ कर देखते हैं तो उनकी जड़े काली मिलती हैं। इस बीमारी की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बान्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलो बीज की दर से सुखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जडग़लन रोग का इलाज मात्र 15 रूपये के बीज उपचार से संभव है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्वेश्य किसानों का बीज उपचार और ग्वार की पैदावार बढ़ानें की नई तकनीक के बारे में प्ररित करना है।
एटीएम डा. मदन सिंह ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्कीमों के बारे में पूरी जानकारी दी। इसके अलावा प्राकृतिक खेती अपनाने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ-साथ उन्होंने फसल चक्र अपनाने की विशेष जानकारी दी और इसके महत्वता के बारे में बताया। डा. यादव ने किसानों को ग्वार की उन्नतशील किस्में एचजी 365 और एचजी 563 इस क्षेत्र में बोने की विशेष सलाह दी, ये किस्में 85 से 100 दिन की अवधि में पक जाती हैं, तथा इसके बाद सरसों की फसल आसानी से ली जा सकती है। बीज की मात्रा किस्म पर निर्भर करती है और इसके लिए 4-5 किलो बीज प्रति एकड़ की दर डालने की सलाह दी। ग्वार की बिजाई पोरा विधि से ही करें और छिटा मारकर इसकी बिजाई बिल्कुल न करें।
गोष्ठी के दौरान डा. यादव ने किसानों को विशेष सलाह दी कि इस क्षेत्र में पानी की कमी है और पानी का स्तर बहुत नीचे गिरता जा रहा है। इसलिए किसान पानी लगाकर ग्वार की बिजाई न करें। ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा बिजाई के लिए सबसे उचित है ग्वार की बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर ही करें। ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों से आग्रह किया अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलो सिंगल सुपरफास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालने के लिए सलाह दी।
इस अवसर पर शिविर मे 65 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई तथा एक जोड़ी दस्ताने हिन्दुस्तान गम् एण्ड कैमिकल्स भिवानी की तरफ से मुफ्त दी गई। इस प्रोग्राम को कामयाब करने में नम्बरदार सुभाषचंद का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा इस अवसर पर सुबेसिंह, जयबीर सिंह, नरेन्द्रंिसह, राजेश, सुरेन्द्र, अनिल, ओमप्रकाश व रणसिंह आदि किसान मौजूद रहे।
गोष्ठी में किसानों से रूबरू होने पर पता चला किसानों को जडग़लन व झुलसा रोग की रोकथाम के बारे में बहुत कम जानकारी है इसलिए इस तरह की ट्रेनिंग करना किसान के बहुत ही हित में है। ग्वार विशेषज्ञ डा. बीडी यादव ने ग्वार की कम पैदावार होने का जडग़लन व झुलसा रोग मुख्य कारण बताए। डा. यादव ने बताया कि उखेड़ा बीमारी के जीवाणु जमीन में पनपते हैं व ग्वार के उगते हुए पौधों की जड़ों को काला कर देते हैं। जिससे पौधें जमीन से नमी व खुराक लेना बंद कर देते हैं। इस कारण पौधें मुरझाकर पीले हो कर मर जाते हैं। ऐसे पौधों को जब जमीन से उखाड़ कर देखते हैं तो उनकी जड़े काली मिलती हैं। इस बीमारी की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बान्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलो बीज की दर से सुखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जडग़लन रोग का इलाज मात्र 15 रूपये के बीज उपचार से संभव है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्वेश्य किसानों का बीज उपचार और ग्वार की पैदावार बढ़ानें की नई तकनीक के बारे में प्ररित करना है।
एटीएम डा. मदन सिंह ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्कीमों के बारे में पूरी जानकारी दी। इसके अलावा प्राकृतिक खेती अपनाने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ-साथ उन्होंने फसल चक्र अपनाने की विशेष जानकारी दी और इसके महत्वता के बारे में बताया। डा. यादव ने किसानों को ग्वार की उन्नतशील किस्में एचजी 365 और एचजी 563 इस क्षेत्र में बोने की विशेष सलाह दी, ये किस्में 85 से 100 दिन की अवधि में पक जाती हैं, तथा इसके बाद सरसों की फसल आसानी से ली जा सकती है। बीज की मात्रा किस्म पर निर्भर करती है और इसके लिए 4-5 किलो बीज प्रति एकड़ की दर डालने की सलाह दी। ग्वार की बिजाई पोरा विधि से ही करें और छिटा मारकर इसकी बिजाई बिल्कुल न करें।
गोष्ठी के दौरान डा. यादव ने किसानों को विशेष सलाह दी कि इस क्षेत्र में पानी की कमी है और पानी का स्तर बहुत नीचे गिरता जा रहा है। इसलिए किसान पानी लगाकर ग्वार की बिजाई न करें। ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा बिजाई के लिए सबसे उचित है ग्वार की बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर ही करें। ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों से आग्रह किया अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलो सिंगल सुपरफास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालने के लिए सलाह दी।
इस अवसर पर शिविर मे 65 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई तथा एक जोड़ी दस्ताने हिन्दुस्तान गम् एण्ड कैमिकल्स भिवानी की तरफ से मुफ्त दी गई। इस प्रोग्राम को कामयाब करने में नम्बरदार सुभाषचंद का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा इस अवसर पर सुबेसिंह, जयबीर सिंह, नरेन्द्रंिसह, राजेश, सुरेन्द्र, अनिल, ओमप्रकाश व रणसिंह आदि किसान मौजूद रहे।