कृषि रसायनों के दुष्प्रभाव से बचें, प्राकृतिक खेती अपनाएं : डा. अजय कुमार
भिवानी के गांव हंसावास में प्राकृतिक खेती पर कृषि शिविर आयोजित। रसायनों के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए वैज्ञानिकों ने जल-संरक्षण और जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया।
Updated: Jun 11, 2026, 18:26 IST
भिवानी, 11 जून : कृषि रसायनों पर किसानों की निर्भरता निरन्तर बढ़ रही है, जिसके कारण पैदावार भी बढ़ी है। परन्तु इनको तर्कसंगत प्रयोग ना होने के कारण हमारी जमीन, पानी व खाद्यान प्रदुषित हो रहे हैं। जिसके फलस्वरूप स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उभर रही हैं। अगर इनके दुरुपयोग को न रोका गया तो भावी पीढिय़ों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। अत: समय रहते हमें प्राकृतिक खेती की ओर बढऩा चाहिए। तात्कालिक लाभ के लिए हम अपनी जमीन व पानी को खराब नहीं कर सकते। यह बात खण्ड कृषि अधिकारी बाढड़ा, डा. अजय कुमार ने व्यक्त किए। वे गांव हंसावास में आयोजित प्राकृतिक खेती पर आयोजित कृषि शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे। शिविर का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिंदुस्तान गम एण्ड कैमिकल्स भिवानी ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर ही कृषि रसायनों का प्रयोग करें। इससे पूर्व एच.ए.यू. हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत वैज्ञानिक डा. आर.के. सैनी ने ग्वार फसल को हानि पहुंचाने वाले विभिन्न कीटों व बीमारियों तथा इनकी रोकथाम के उपायों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने किसानों को गैर रासायनिक तरीकों से कीटों व बीमारियों के समाधान पर बल दिया। कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत वैज्ञानिक डा. जगदेव सिंह ने जल-संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला तथा भूमि में जैविक खादों के माध्यम से आर्गेनिक कार्बन बढ़ाने की सलाह दी ताकि भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहे। प्रगतिशील किसान नरेन्द्र शर्मा ने प्राकृतिक खेती के अपने अनुभवों को किसानों से सांझा किया तथा किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के। उचित मार्गदर्शन व सहयोग देने का वादा किया। शिविर में लगभग 70 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर बीज उपचार की दवा के सैम्पल तथा कृषि साहित्य भी मुफ़्त वितरित किए गाए।