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देश को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की कवायद हुई तेज
 

अब हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से टीबी स्क्रीनिंग होगी आसान: भिवानी के गांवों में विशेष अभियान शुरू
एआई तकनीक से लैस है हैंडहेल्ड मशीन, लाइव होगी स्क्रीनिंग : एसएमओ डा. नागेश महर्षि
 
 

भिवानी, 22 जून : 
देश को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को गति देने के लिए जिले में जल्द ही आधुनिक स्क्रीनिंग प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है। हैंडहेल्ड (हाथ में उठाने योग्य) एक्स-रे मशीनों के आने से मौके पर ही मरीजों की पहचान में तेजी आएगी। भिवानी डिप्टी सिविल सर्जन डा. सुमन विश्वकर्मा के आदेशानुसार और धनाना के एसएमओ डा. नागेश महर्षि की अध्यक्षता में एक विशेष एक्स-रे अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम के नोडल ऑफिसर राजेश कुमार (फार्मेसी ऑफिसर) और स्वास्थ्य निरीक्षक राजेश कुमार की देखरेख में स्वास्थ्य टीम ने गांवों में जाकर इस अभियान को सफलतापूर्वक चलाया। 
       स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इन आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के आने से टीबी स्क्रीनिंग प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो जाएगी। इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर जांच कर मरीजों की तुरंत पहचान की जा सकेगी। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित तकनीक पर काम करती है, जिससे मरीजों की लाइव स्क्रीनिंग भी संभव होगी। इस मशीन की सहायता से मरीज को सीधा खड़ा करके आसानी से एक्स-रे किया जा सकता है। 
      स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ओमवीर (एमपीएचडब्ल्यू) ने बताया कि हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का मुख्य उपयोग टीबी मरीजों की समय पर पहचान के लिए किया जाएगा। शहर से दूरदराज के गांवों और अन्य पिछड़े क्षेत्रों में लगाए जाने वाले जांच शिविरों में इन मशीनों का विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों की मौके पर ही स्क्रीनिंग की जा सके और कोई भी संभावित मरीज जांच से न छूटे। इस विशेष अभियान के तहत महेंद्र सिंह (रेडियोग्राफर) द्वारा ग्रामीणों के एक्स-रे किए गए। 
     अभियान को धरातल पर उतारने में मुंढाल खुर्द से रमेश कुमार (एमपीएचडब्ल्यू), भैणी जाटान से रेणु (एमपीएचडब्ल्यू-एफ), ओमवीर (एमपीएचडब्ल्यूए-एम) और संबंधित सब-सेंटर की सभी आशा वर्कर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने क्षेत्र की संवेदनशील जनसंख्या और 5 वर्ष तक के टीबी मरीजों के संपर्क में आए लोगों के एक्स-रे करवाए। मौके पर ही मरीजों की निक्षय आईडी बनाई गई और ग्रामीणों को टीबी के लक्षण व इससे बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारी देकर जागरूक किया गया।