मिड-डे-मील कुकों की समस्याओं के समाधान हेतु ज्ञापन सौंपा
भिवानी में मिड-डे मील कर्मियों ने 10 सूत्री मांगों के लिए किया प्रदर्शन। 15,220 रुपये वेतन, नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन।
Jun 10, 2026, 17:46 IST
भिवानी 10 जून : एआईयूटीयूसी व स्कीम वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया से संबद्ध मिड-डे-मील कार्यकर्ता यूनियन हरियाणा (रजि. नं. 2077) के बैनर तले बुधवार को मिड-डे मील कर्मियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर शहर में प्रदर्शन किया और उपायुक्त के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रांत में घोषित न्यूनतम वेतन 15220 रुपये मासिक देने, केंद्र व राज्य का मानदेय एक साथ समय पर भुमतान करने, साल में ड्रेस के कम से कम तीन हजार रुपये देने, सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने और सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये सहायता राशि और पेंशन देने, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर कम से कम 5 लाख रुपये मुआवजा देने, महंगाई के हिसाब से बच्चों के राशन के पैसे बढ़ाने, यूनियन की महासचिव कुसुम पांचाल समेत हटायी गई सभी वर्करों को ड्यूटी पर लेने, ड्यूटी पर अपमानित न करने और हमसे इन्सानों जैसा व्यवहार करने, कुक को नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा देन और ग्रीष्मकालीन अवकाश का वेतन काटने के बजाय पूरे 12 महीने का मानदेय देने की मांग की गई।
इस मौके पर यूनियन की जिला प्रधान मीरा देवी ने कहा कि हम मिड-डे-मील कुक राजकीय विद्यालयों में स्कूल खुलने से बंद होने तक ड्यूटी कर बच्चों के मिड-डे-मील की व्यवस्था करती हैं और रोजाना 8 घण्टे काम करती हैं। लेकिन इतनी कड़ी मेहनत करने पर भी मिड-डे-मील कुक-कम-हेल्परों को मामूली-सा 7000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है और यह भी समय पर नहीं मिलता है। इसका केंद्र का हिस्सा मिलने में तो कई-कई महीने गुजर जाते हैं। हमें साल में मात्र 10 माह का मानदेय मिलता है, जबकि बाकी सबको 12 माह का मिलता है। यह सरासर भेदभाव है। इसलिए 12 महीने का वेतन और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। दो ड्रेस के मात्र 600 रुपये मिलते हैं, जिसमें सिलाई भी नहीं होती है। आज बढ़ती महंगाई इतने कम पैसों में गुजारा करना मुश्किल है। हरियाणा सरकार ने अभी जो 15220 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन घोषित किया है, सबका वेतन बढ़ाया गया, लेकिन हमारा तो वह भी नहीं बढ़ाया गया है। झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर हमारी यूनियन की महासचिव कुसुम पांचाल समेत कई कर्मियों को नौकरी से निकाला हुआ है। हमारा अनुरोध है कि उनको बहाल किया जाये। हमसे कुक की ड्यूटी से बाहर के काम लिये जाते हैं और स्कूल में हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता है। जब सरकार ही हमें नौकरी पर लगाती है और हम सरकारी स्कीम के तहत मिड-डे-मील कार्यकर्ता अपनी सेवाएं सरकारी स्कूलों में प्रदान कर रही हैं, तो हमें सरकारी कर्मचारी का दर्जा तो मिलना ही चाहिए। अगर इसमें कोई दिक्कत महसूस की जाती है, तो कम से कम श्रमिक का दर्जा दिया ही जाए, जिससे नौकरी से जुड़ी दूसरी सुविधाएं भी हमें मिल सकें।
उन्होंने कहा कि राज्य प्रधान राजबाला ने कहा कि -डे-मील स्कीम में बेहद गरीब, बेसहारा और विधवा महिलाएँ लगी हुई हैं, जो परिवार की आमदनी का एकमात्र सहारा हैं। मिड-डे-मील बनाने के बाद उनको घर का दूसरा कोई काम करने का भी समय नहीं बचता है। श्रमिक की बजाय कार्यकर्ता और वेतन की जगह मानदेय की आड़ में इस योजना में कार्यरत श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है। सरकार बेरोजगारी का नाजायज फायदा उठा रही है। हाजिरी रजिस्टर, जीवन बीमा, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, पेंशन, सवेतन अवकाश, बीमार पड़ने पर इलाज आदि सामाजिक सुरक्षा उपायों, हितलाभों व सुविधाओं से भी मिड-डे-मील कार्यकर्ता वंचित हैं। स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने पर मिड-डे-मिल कार्यकर्ता को काम से हटा दिया जाता है, चाहे वह कितने ही साल से काम करती हो। मिड-डे-मील कर्मियों की नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। यह सरासर अन्याय है। उन्होंने मांग की कि कई सालों से पुरानी लगी हुई मिड-डे-मील कुकों को हटाना नहीं चाहिए।
प्रदर्शन को एआईयूटीयूसी के भिवानी जिला सचिव राजकुमार बासिया, जिला प्रधान धर्मवीर सिंह ने भी सम्बोधित किया। श्रमिक नेताओं ने कहा कि मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं सहित सभी स्कीम वर्करों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे लाना, जीने लायक वेतन देना, आज कमरतोड़ महंगाई में देना तो चाहिए 28000 रुपये मासिक वेतन, लेकिन सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन जितना मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है। मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं को महंगाई भत्ता व महंगाई के हिसाब से मेहनताना नहीं दिया जाता है। वेतन में वार्षिक बढ़ोतरी भी नहीं होती है। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन से कम पैसों में मिड-डे-मील, कुक-कम-हेल्परों से काम कराना भी बंधुआ मजदूरी कराने के बराबर है और शोषण है। उन्होंने मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का सरकार से अनुरोध किया। वक्ताओं ने मिड-डे-मील कर्मियों से भी ज्वलंत मांगों को लेकर आन्दोलन तेज करने का आह्वान किया और आगामी 24 जून को भिवानी में प्रांतीय स्तर के प्रदर्शन में बढ़चढ़कर शामिल होने की पुरजोर अपील की।
ज्ञापन में प्रांत में घोषित न्यूनतम वेतन 15220 रुपये मासिक देने, केंद्र व राज्य का मानदेय एक साथ समय पर भुमतान करने, साल में ड्रेस के कम से कम तीन हजार रुपये देने, सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने और सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये सहायता राशि और पेंशन देने, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर कम से कम 5 लाख रुपये मुआवजा देने, महंगाई के हिसाब से बच्चों के राशन के पैसे बढ़ाने, यूनियन की महासचिव कुसुम पांचाल समेत हटायी गई सभी वर्करों को ड्यूटी पर लेने, ड्यूटी पर अपमानित न करने और हमसे इन्सानों जैसा व्यवहार करने, कुक को नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा देन और ग्रीष्मकालीन अवकाश का वेतन काटने के बजाय पूरे 12 महीने का मानदेय देने की मांग की गई।
इस मौके पर यूनियन की जिला प्रधान मीरा देवी ने कहा कि हम मिड-डे-मील कुक राजकीय विद्यालयों में स्कूल खुलने से बंद होने तक ड्यूटी कर बच्चों के मिड-डे-मील की व्यवस्था करती हैं और रोजाना 8 घण्टे काम करती हैं। लेकिन इतनी कड़ी मेहनत करने पर भी मिड-डे-मील कुक-कम-हेल्परों को मामूली-सा 7000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है और यह भी समय पर नहीं मिलता है। इसका केंद्र का हिस्सा मिलने में तो कई-कई महीने गुजर जाते हैं। हमें साल में मात्र 10 माह का मानदेय मिलता है, जबकि बाकी सबको 12 माह का मिलता है। यह सरासर भेदभाव है। इसलिए 12 महीने का वेतन और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। दो ड्रेस के मात्र 600 रुपये मिलते हैं, जिसमें सिलाई भी नहीं होती है। आज बढ़ती महंगाई इतने कम पैसों में गुजारा करना मुश्किल है। हरियाणा सरकार ने अभी जो 15220 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन घोषित किया है, सबका वेतन बढ़ाया गया, लेकिन हमारा तो वह भी नहीं बढ़ाया गया है। झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर हमारी यूनियन की महासचिव कुसुम पांचाल समेत कई कर्मियों को नौकरी से निकाला हुआ है। हमारा अनुरोध है कि उनको बहाल किया जाये। हमसे कुक की ड्यूटी से बाहर के काम लिये जाते हैं और स्कूल में हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता है। जब सरकार ही हमें नौकरी पर लगाती है और हम सरकारी स्कीम के तहत मिड-डे-मील कार्यकर्ता अपनी सेवाएं सरकारी स्कूलों में प्रदान कर रही हैं, तो हमें सरकारी कर्मचारी का दर्जा तो मिलना ही चाहिए। अगर इसमें कोई दिक्कत महसूस की जाती है, तो कम से कम श्रमिक का दर्जा दिया ही जाए, जिससे नौकरी से जुड़ी दूसरी सुविधाएं भी हमें मिल सकें।
उन्होंने कहा कि राज्य प्रधान राजबाला ने कहा कि -डे-मील स्कीम में बेहद गरीब, बेसहारा और विधवा महिलाएँ लगी हुई हैं, जो परिवार की आमदनी का एकमात्र सहारा हैं। मिड-डे-मील बनाने के बाद उनको घर का दूसरा कोई काम करने का भी समय नहीं बचता है। श्रमिक की बजाय कार्यकर्ता और वेतन की जगह मानदेय की आड़ में इस योजना में कार्यरत श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है। सरकार बेरोजगारी का नाजायज फायदा उठा रही है। हाजिरी रजिस्टर, जीवन बीमा, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, पेंशन, सवेतन अवकाश, बीमार पड़ने पर इलाज आदि सामाजिक सुरक्षा उपायों, हितलाभों व सुविधाओं से भी मिड-डे-मील कार्यकर्ता वंचित हैं। स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने पर मिड-डे-मिल कार्यकर्ता को काम से हटा दिया जाता है, चाहे वह कितने ही साल से काम करती हो। मिड-डे-मील कर्मियों की नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। यह सरासर अन्याय है। उन्होंने मांग की कि कई सालों से पुरानी लगी हुई मिड-डे-मील कुकों को हटाना नहीं चाहिए।
प्रदर्शन को एआईयूटीयूसी के भिवानी जिला सचिव राजकुमार बासिया, जिला प्रधान धर्मवीर सिंह ने भी सम्बोधित किया। श्रमिक नेताओं ने कहा कि मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं सहित सभी स्कीम वर्करों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे लाना, जीने लायक वेतन देना, आज कमरतोड़ महंगाई में देना तो चाहिए 28000 रुपये मासिक वेतन, लेकिन सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन जितना मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है। मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं को महंगाई भत्ता व महंगाई के हिसाब से मेहनताना नहीं दिया जाता है। वेतन में वार्षिक बढ़ोतरी भी नहीं होती है। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन से कम पैसों में मिड-डे-मील, कुक-कम-हेल्परों से काम कराना भी बंधुआ मजदूरी कराने के बराबर है और शोषण है। उन्होंने मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का सरकार से अनुरोध किया। वक्ताओं ने मिड-डे-मील कर्मियों से भी ज्वलंत मांगों को लेकर आन्दोलन तेज करने का आह्वान किया और आगामी 24 जून को भिवानी में प्रांतीय स्तर के प्रदर्शन में बढ़चढ़कर शामिल होने की पुरजोर अपील की।