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Air Pollution GRAP 3 News 2026: भिवानी में प्रदूषण पर कड़ा एक्शन: स्टोन क्रशर और माइनिंग इकाइयां तुरंत बंद, निर्माण कार्यों पर 20 नवंबर तक रोक

बढ़ते प्रदूषण के कारण भिवानी में स्टोन क्रशर और माइनिंग इकाइयां तुरंत बंद। निर्माण कार्यों पर 20 नवंबर तक रोक। पूरी खबर पढ़ें।
 

बढ़ते प्रदूषण के कारण भिवानी में माइनिंग और स्टोन क्रशर इकाइयों को तुरंत बंद करने के आदेश

भिवानी, 07 नवंबर। दिल्ली-एनसीआर में हवा की बिगड़ती गुणवत्ता और प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भिवानी क्षेत्रीय कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड ने जिले में चल रहे सभी स्टोन क्रशर और माइनिंग (खनन) व उससे जुड़ी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश जारी किए हैं।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा 6 नवंबर  को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए क्षेत्रीय अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि पूरे एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण को रोकने के लिए संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के चरण-3 को लागू कर दिया गया है। इसके तहत स्टेज-1 और स्टेज-2 के प्रतिबंध पहले से ही लागू हैं, और अब स्टेज-3 के तहत सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

अवहेलना करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई:

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भिवानी जिले की सभी स्टोन-क्रशिंग और माइनिंग इकाइयां अपने प्लांट तुरंत बंद कर दें। यदि कोई भी इकाई इन आदेशों का उल्लंघन करती हुई या चलती हुई पाई गई, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

जिले में धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर 20 नवंबर तक पूर्ण प्रतिबंध, आदेश जारी

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भिवानी क्षेत्रीय अधिकारी ने जिले में धूल पैदा करने वाली सभी तोड़फोड़ और खुले में होने वाले निर्माण कार्यों पर 20 नवंबर तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 5 नवंबर से लागू हो चुका है।

प्रशासन ने इसे 'अत्यंत आवश्यक' श्रेणी में रखते हुए पुलिस, प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, बिजली निगम, नेशनल हाईवे, वन विभाग और नगर परिषद सहित भिवानी, तोशाम, लोहारू और सिवानी के सभी आला अधिकारियों को जमीन पर नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।

इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी रहेगी रोक:

इस आदेश के तहत धूल उड़ाने वाली सभी रैखिक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी दायरे में आएंगी। इनमें राजमार्ग और सड़के, फ्लाईओवर्स और ओवरब्रिज, बिजली पारेषण लाइनें, पाइपलाइन बिछाने और दूरसंचार से जुड़े कार्य  शामिल है। 

इन्हें मिली है विशेष छूट:

आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार, केवल राष्ट्रीय महत्व और आवश्यक जन सुविधाओं से जुड़े कुछ चुनिंदा प्रोजेक्ट्स को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है, बशर्ते वे प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करें। इनमें रेलवे और मेट्रो सेवाएं, हवाई अड्डे, अंतर-राज्यीय बस टर्मिनस,अस्पताल,  जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, परियोजनाए, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कार्य  शामिल है।

अवहेलना करने पर ठेकेदारों पर होगी कड़ी कार्रवाई:

क्षेत्रीय अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सभी विभागों के प्रमुख अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी ठेकेदारों, निर्माण एजेंसियों और संबंधित पक्षों को तुरंत निर्देश जारी करें। यदि प्रतिबंध की अवधि (20 नवंबर तक) के दौरान कोई भी प्रतिबंधित निर्माण या तोड़फोड़ की गतिविधि करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आयोग के नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।