Tosham Police Station Case: पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी को मिली कड़ी सजा, एसपी मयंक मिश्रा के निर्देश पर हुई थी त्वरित कार्रवाई
भिवानी के तोशाम थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा और 30 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है।
भिवानी, नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को 10 साल की सजा, कोर्ट ने लगाया 30 हजार का जुर्माना
थाना तोशाम पुलिस द्वारा मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को किया गया था गिरफ्तार।
भिवानी हलचल 30 September 2026 : थाना तोशाम में पीड़िता नाबालिग लड़की की माता द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि आरोपी द्वारा उनकी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया है। शिकायत प्राप्त होते ही थाना तोशाम पुलिस द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत अभियोग दर्ज कर तत्काल प्रभावी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई। पुलिस टीम द्वारा मामले में आरोपी बलराम पुत्र सुरेश, निवासी बाबरवास, तहसील तोशाम, जिला भिवानी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
अभियोग की जांच के दौरान पुलिस द्वारा मामले से संबंधित आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए गए तथा गवाहों के बयान दर्ज कर चालान माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोग के ट्रायल के दौरान माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया गया।
मामले में माननीय न्यायालय श्रीमती सुरुचि अटरेजा सिंह, एडिशनल सेशन जज, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, भिवानी द्वारा आरोपी बलराम पुत्र सुरेश, निवासी बाबरवास, तहसील तोशाम, जिला भिवानी को पॉक्सो एक्ट के तहत 10 वर्ष के कारावास एवं ₹ 20,000/- रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
इसके अतिरिक्त आरोपी को धारा 137(1)(b )बीएनएस के तहत 07 वर्ष के कारावास एवं ₹ 10,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इस प्रकार आरोपी पर कुल ₹ 30,000 का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
पुलिस अधीक्षक भिवानी श्री मयंक मिश्रा, आईपीएस द्वारा जिले के सभी थाना प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि महिला एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। ऐसे मामलों में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के साथ-साथ अभियोग के ट्रायल के दौरान मजबूत पैरवी एवं पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, ताकि दोषी व्यक्तियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जा सके तथा पीड़ित को न्याय मिल सके।