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छोटी काशी में गूंजे अध्यात्म और राष्ट्रभक्ति के सुर
 

परमहंस योगाश्रम में वार्षिक महोत्सव के तहत भव्य कवि सम्मेलन और सत्संग आयोजित
संत कबीर का जीवन और वाणी समाज के लिए मार्गदर्शक : स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती
 
 
भिवानी, 07 जून : छोटी काशी के नाम से विख्यात भिवानी की पावन धरा इन दिनों एक अनूठे आध्यात्मिक प्रवाह में सराबोर है। स्थानीय तपोभूमि परमहंस योगाश्रम धाम में श्रीश्री 1008 स्वामी भास्करानंद परमहंस महाराज की पुण्यस्मृति में आयोजित वार्षिक महोत्सव के चलते पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। महोत्सव के तहत जहां रोजाना सुबह पावन हवन यज्ञ और सत्संग का आयोजन किया जा रहा है, वहीं इसी कड़ी में एक भव्य एवं विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को राष्ट्रभक्ति और साहित्य के अनूठे रंग में सराबोर कर दिया। कवि सम्मेलन में देश के अंतर्राष्ट्रीय कवि राजेश चेतन ने मुख्य आकर्षण के रूप में शिरकत की। राष्ट्रचेतना के स्वर को मुखर करते हुए राजेश चेतन ने देश की माटी और संस्कृति से जुडऩे का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें हर परिस्थिति में अपने राष्ट्र को आगे बढ़ाना चाहिए। राष्ट्र की उन्नति में ही हम सबकी उन्नति निहित है। हमारे महापुरुषों और मर्यादाओं का जीवन हमें यही सीख देता है। इस दौरान राजेश चेतन ने जब अपनी प्रसिद्ध कविता राम वन गए तो बन गए का ओजस्वी पाठ किया, तो पूरा आश्रम परिसर तालियों की गडग़ड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा। उनके अलावा देश के जाने-माने कवि बलजीत कौर तन्हा, संदीप सर्ज और अंकुर अग्रवाल ने भी अपनी शानदार और मर्मस्पर्शी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कवि सम्मेलन से पूर्व आयोजित सत्संग सभा में श्रद्धालुओं को ज्ञान की अमृतवर्षा से सराबोर करते हुए तपोभूमि परमहंस योगाश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती महाराज व मुख्य कथाव्यास स्वामी मदन मोहन अलंकार ने संत प्रवर कबीरदास के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत कबीर जी एक महान भक्त होने के साथ-साथ अद्वितीय समाज सुधारक थे। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों और जाति-पाति का पुरजोर विरोध करते हुए मानवता का संदेश दिया। उन्होंने ईश्वर की निष्काम भक्ति को संसार में सबसे श्रेष्ठ बताया है। उन्होंने कहा कि कबीर जी ने हमेशा सच्चे गुरु के महत्व का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने अपने सीधे, सरल और प्रेरणादायक दोहों के माध्यम से साधारण से साधारण व्यक्ति को भी ज्ञान का मार्ग दिखाया। भक्तमाल में भी कबीर जी को एक निर्भीक, परम ज्ञानी और अनन्य भक्त संत के रूप में वर्णित किया गया है। आज के समय में उनकी प्रासंगिक वाणी और भक्ति भाव को जीवन में उतारने की अत्यंत आवश्यकता है।