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निरंकारी बाल संत समागम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ
 

बाल संतों ने समागम में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए मानवता के संदेश प्रसारित किये
 
 
भिवानी 7 जून: सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राज पिता जी के पावन आशीर्वाद से हांसी गेट स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में विशाल निरंकारी बाल संत समागम का भव्य आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता संत निरंकारी मंडल भिवानी जोन के जोनल इंचार्ज श्री बलदेव राज नागपाल जी ने की । इस कार्यक्रम में भिवानी व चरखी दादरी जिलों के ग्रामीण तथा शहरी इलाकों से भारी संख्या में बाल संतो एवं निरंकारी श्रद्धालुओं ने अपनी हाजिरी दर्ज कराई । बाल संतों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए भजन, गीत, व्याख्यान, कविता के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी एवं हरियाणवी भाषा का सहारा लेते हुए मिशन के संदेश प्रसारित किये। इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं पूज्य निरंकारी राज पिता आदरणीय श्री रमित जी के विचारों को वीडियो के माध्यम से सत्संग में प्रसारित किए गए । निरंकारी राज पिताजी नेअपने विचारों में फरमाया कि भक्ति के मार्ग पर माया व्यवधान पैदा करती है ।माया सिर्फ रुपए पैसा नहीं है बल्कि बीते समय में किए हुए कार्यों को याद करके समय व्यर्थ में बिताना माया का रूप है तथा आने वाले समय का सिर्फ सपना देखते हुए समय बर्बाद करना भी माया है। 
         इस अवसर पर सदगुरु माताज सुदीक्षा जी महाराज ने वीडियो से प्रसारित विचारों में समझाया कि इंसानी जीवन में परमात्मा की प्राप्ति करना ही मुख्य उद्देश्य है। परमात्मा को गृहस्थ जीवन में रहकर भी प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने आगे फरमाया कि हमें शिकवा नहीं शुक्राने वाली भक्ति करनी है। परमात्मा को ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से जाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्म ज्ञान से ही सुकून सभी के जीवन में संभव है। हमारे ग्रंथो में भी दर्ज है कि 
जे सुख को चाहे सदा, शरण राम की ले ।
इस कार्यक्रम में बाल संतों ने हरियाणवी भजन प्रस्तुत किया, जिसके बोल थे :-
मेरा सतगुरु राम मिलावै, 
यो तो कण कण में सै बतावै।
सत्संग समाप्ति पर लंगर प्रसाद श्रद्धा से वितरित किया गया।