जीव हमारी जाति, मानव धर्म हमारा
भिवानी, 03 मई : छोटी काशी के नाम से विख्यात भिवानी के गुजरानी रोड स्थित सतलोक आश्रम में तीन दिवसीय विश्व शांति महा धार्मिक अनुष्ठान का रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हो गया। तीन दिनों तक चले इस विशाल भंडारे और अनुष्ठान को सफल बनाने में भिवानी जिले के सभी कोऑर्डिनेटर्स और हजारों स्वयंसेवकों ने दिन-रात अपनी सेवाएं दीं। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम ने ना केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया, बल्कि सामाजिक सरोकार और मानवता की एक नई परिभाषा भी लिखी। अनुष्ठान के दौरान संत गरीब दास महाराज द्वारा रचित अमर ग्रंथ साहिब की अमर वाणियों का अखंड पाठ किया गया। तीन दिनों तक निरंतर चली इन दिव्य वाणियों से पूरा परिसर भक्तिमय रहा।
इस महा समागम में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने शिरकत की, जिनका प्रबंधन आश्रम समिति द्वारा बेहद सुव्यवस्थित तरीके से किया गया। यह आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को नई दिशा देने का काम किया। आयोजन के दूसरे दिन दौरान 6 जोड़ों का रमैणी (गुरुवाणी के माध्यम से बिना किसी तामझाम और दहेज के) विवाह संपन्न कराया गया था तथा वही मानवता की सेवा में कदम बढ़ाते हुए 150 यूनिट रक्त दान भी किया गया था। आश्रम प्रबंधन समिति और सेवादारों ने संत रामपाल महाराज के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा कि महाराज का एकमात्र उद्देश्य विश्व में शांति स्थापित करना और बिखरे हुए मानव समाज को एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि संत रामपाल महाराज का संदेश स्पष्ट है कि जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। यह अनुष्ठान केवल एक धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना है। हम एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जहां न नशा हो, न दहेज और न ही जात-पात का भेदभाव। लाखों श्रद्धालुओं ने यहाँ भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और सेवा का संकल्प लेकर अपने घरों को लौटे हैं।