- चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय की छात्रा सीमा ने एशियन गेम्स- 2026 के लिए किया क्वालीफाई
- पीएचडी के साथ ओलंपिक का सपना, डिस्कस थ्रोअर सीमा की नजर एलए- 2028 पर
भिवानीए 27 जून। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी के फिजिकल एजुकेशन (शारीरिक शिक्षा) विभाग की पीएचडी, स्कॉलर सीमा ने एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। सीमा की इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर, डॉ. सुरेश मलिक ने जानकारी देते हुए बताया कि सीमा बहुत अच्छी खिलाड़ी है। कड़ी मेहनत और लगन से उसने विश्वविद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2028 के ओलंपिक खेल में सीमा अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगी।
विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने सीमा के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए बहुत हर्ष और गर्व की बात है। उन्होंने स्पोट्र्स विभाग की सराहना करते हुए खिलाड़ी सीमा को जीत के लिए बधाई दी और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि हमारी बेटी निश्चित तौर पर ओलंपिक में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर देश प्रदेश के साथ इस क्षेत्र एवं विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेगी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी विद्यार्थियों को उच्च किस्म की शिक्षा प्रदान की जाती है। विश्वविद्यालय के एक खेल विभाग के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल कर अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी खेलों की और विश्वविद्यालय में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पीएचडी और खेल में साधा संतुलन-
भिवानी निवासी डिस्कस थ्रोअर, चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा कलीरमन ने खेल और पीएचडी के बीच संतुलन साधते हुए लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने का सपना देख रही हैं। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहीं सीमा अपने शोध विषय इमेजरी एंड पॉजिटिव सेल्फ.टॉक ट्रेनिंग ऑन एथलेटिक परफॉर्मेंस, खिलाड़ी के प्रदर्शन पर कल्पना शक्ति और सकारात्मक आत्म संवाद प्रशिक्षण का प्रभाव पर कार्य कर रही हैं।
रांची में जीता स्वर्ण पदक-
सीमा ने हाल ही में रांची में आयोजित साउथ एशियन सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप, दक्षिण एशियाई वरिष्ठ एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इस वर्ष उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 57.18 मीटर चेन्नई में नेशनल इंटर-स्टेट मीट, राष्ट्रीय अंतर-राज्य प्रतियोगिता में रहा।
चोट से उबरकर फिर लौटीं मैदान में-
कुछ वर्ष पहले बाएं घुटने की चोट के कारण सीमा तीन साल से अधिक समय तक प्रतियोगिता से बाहर रहीं। डॉक्टरों ने सर्जरी, शल्य चिकित्सा की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने सर्जरी नहीं कराई। उसी दौरान कोविड महामारी शुरू हो गई और उन्हें घुटना ठीक करने का समय मिल गया।
पति हैं कोच, परिवार का मिल रहा पूरा सहयोग
सीमा के पति रविंद्र ही उनके कोच भी हैं। सीमा के अनुसार घर पर वे उनके पति हैं, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान कोच बन जाते हैं। रविंदर ने ही सीमा को खेल को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया। सीमा के माता-पिता और ससुराल पक्ष बच्चे की देखभाल करते हैं, जबकि रविंदर ट्रेनिंग संभालते हैं। इस सहयोग से सीमा अपनी पीएचडी की कक्षाओं और कोर्स वर्क, कार्य पर भी ध्यान दे पाती हैं।
अगला लक्ष्य एलए 2028 ओलंपिक एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में क्वालीफाई करने के बाद अब सीमा का सपना लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक 2028 में देश के लिए गौरव हासिल करना है।
इस उपलब्धि पर कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा सहित विश्वविद्यालय के सभी डीन एवं प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने विजेता खिलाड़ी सीमा को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सीमा की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के अन्य छात्र छात्राओं को प्रेरित करेगी और विश्वविद्यालय खेलों और खेल शिक्षा पर फोकस करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।