- 31 मार्च 2004 से पहले बने शामलात भूमि के मकानों के नियमितीकरण के लिए करें ऑनलाइन आवेदन: एडीसी दीपक बाबू लाल करवा
- पात्र कब्जाधारक समाधान पोर्टल पर स्वयं करें आवेदन, योजना का उठाएं लाभ
- 500 वर्ग गज तक के पात्र मकानों के नियमितीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित
- 31 मार्च 2004 अथवा उससे पूर्व निर्मित मकानों के लिए लागू योजना, कम से कम 20 वर्ष का कब्जा होना आवश्यक
भिवानी, 25 जुलाई। एडीसी दीपक बाबू लाल करवा ने बताया कि विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा शामलात भूमि पर 31 मार्च 2004 अथवा उससे पूर्व निर्मित अनाधिकृत आवासीय मकानों के नियमितीकरण एवं पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभाग द्वारा इसके लिए समाधान पोर्टल https://samadhan.haryanadp.gov.in/
शुरू किया गया है, जिस पर पात्र कब्जाधारक स्वयं आवेदन कर सकते हैं।
श्री करवा ने बताया कि विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई गई जानकारी के अनुसार शामलात भूमि पर 31 मार्च 2004 अथवा उससे पूर्व निर्मित अनाधिकृत आवासीय मकानों के नियमितीकरण एवं पंजीकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। ऐसे सभी अनाधिकृत कब्जाधारक, जो अपनी आवासीय भूमि का नियमितीकरण अथवा पंजीकरण करवाना चाहते हैं, वे समाधान पोर्टल के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि आवेदन के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों के अनुसार आवासीय मकान का निर्माण 31 मार्च 2004 अथवा उससे पूर्व किया गया होना चाहिए। संबंधित भू-खंड का क्षेत्रफल 500 वर्ग गज से अधिक नहीं होना चाहिए तथा आवेदक का उक्त भूमि पर लगातार कम से कम 20 वर्षों से कब्जा होना आवश्यक है। पात्र आवेदक समाधान पोर्टल पर स्वयं आवेदन कर योजना का लाभ उठा सकते हैं।
एडीसी ने बताया कि सरकारी निर्देशों के अनुसार भूमि का विक्रय मूल्य वर्ष 2004 अथवा उपलब्ध अगले वर्ष की कलेक्टर दर के 1.5 गुणा मूल्य पर किया जाएगा।
उन्होंने सभी पात्र व्यक्तियों से अपील की कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर समाधान पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर इस योजना का लाभ उठाएं।
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- डीएलसीसी की समीक्षा बैठक में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के दिए निर्देश: एडीसी
भिवानी, 25 जुलाई। लघु सचिवालय स्थित डीआरडीए सभागार में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) दीपक बाबूलाल कारवा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय क्लीयरेंस कमेटी (डीएलसीसी) की त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से सभी मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एडीसी ने विभिन्न विभागों के कुल 25 आवेदनों पर विचार किया। इनमें से तीन मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि तीन मामलों को निर्धारित मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर अस्वीकृत कर दिया गया। शेष 19 लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें मुख्य रूप से हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, खान एवं भू-विज्ञान सहित अन्य विभागों से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान मोबाइल टावरों से संबंधित 11 मामलों पर चर्चा हुई, जिन्हें संतोषजनक पाया गया। एडीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की खुदाई से पूर्व कॉल बिफोर यू डिग पोर्टल का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाए, ताकि भूमिगत दूरसंचार अवसंरचना को नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट दर्ज करने तथा निर्धारित प्रक्रिया का पूरी गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी उद्योगों और विकास परियोजनाओं से जुड़े मामलों का समय पर निस्तारण करें, इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं का भविष्य अधिक सुरक्षित और सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि उद्योग स्थापित करने के दौरान किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।
बैठक में डीडीपीओ सोमवीर कादियान, टेलीकॉम विभाग से मनीष खुराना, डीएलसीसी से संजीत कौर सहित हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीएचबीवीएन, खान एवं भू-विज्ञान विभाग, बीएंडआर, नगर परिषद/नगर पालिका तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।