कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, अनीता शास्त्री ने बताया कथा का महात्म्य
भिवानी में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आगाज। लक्ष्मी नारायण मंदिर से शिव मंदिर तक निकाली गई भव्य कलश यात्रा। कथा व्यास अनीता शास्त्री ने बताया भागवत महात्म्य।
Jun 2, 2026, 17:02 IST
भिवानी, 02 जून : भिवानी शहर में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का माहौल उस समय और गहरा गया, जब क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर आयोजित भव्य कलश यात्रा में भारी संख्या में मातृशक्ति और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया। कथा के प्रथम दिन मंगलवार को कलश यात्रा का आयोजन किया गया। यह कलश यात्रा स्थानीय लक्ष्मी नारायण मंदिर से विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई। सिर पर मंगल कलश धारण किए, पारंपरिक परिधानों में सजी मातृशक्ति जब भजनों की धुन पर आगे बढ़ी, तो पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। आज की कथा में विशेष रूप से कलश स्थापना के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया गया। कलश यात्रा स्थानीय भीम स्टेडियम रोड़ पर सदर थाना के पास स्थित शिव मंदिर पर संपन्न हुई। इस धार्मिक महोत्सव में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही। कलश यात्रा और कथा के शुभारंभ पर उपस्थित प्रमुख महिलाओं में सुजीता, बिम्मी, सुषमा, सरोज, राजबाला, संतोष, नीतू, ज्योति, गंगा, सुशीला, मनजीत, पूनम, निशा, सुनीता, बाला, वीना, मिथलेश, पिंका, बबीता, दीपांशी, नीतू, कविता, सीमा, शबनम और अनन्या सहित सैकड़ों महिलाओं ने बढ़-चढक़र अपनी हाजिरी लगाई। इस अवसर पर समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी आयोजन में भाग लिया, जिनमें मुख्य रूप धर्मवीर भूतपूर्व एएसआई, पुजारी शिवकुमार, पुजारी अमित व मनोज, डा. श्यामेन्दु सिंह, धर्मपाल भूतपूर्व सैनिक और हरीश शामिल रहे। कलश यात्रा के भव्य आयोजन के बाद कथा पंडाल में विराजमान कथा व्यास अनीता शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण का महात्म्य बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन के तीनों तापों दैहिक (शारीरिक), दैविक (आध्यात्मिक) और भौतिक (सांसारिक) कष्टों को हरने वाली है। इसी पावन कथा के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा विश्व की उत्पत्ति, स्थिति और संहार का चक्र संचालित होता है, जैसा कि शास्त्रों में 'विश्वोत्पत्यादि हेतवे कहकर वर्णित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भागवत कथा मनुष्य को पुण्य प्रदान करने वाली और उसके अनजाने में हुए पापों को नष्ट करने वाली है। आयोजन समिति ने बताया कि क्षेत्र के श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आगे की कथा का समय दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।