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सांस्कृतिक महोत्सव का हुआ आगाज : भिवानी के गांव उमरावत में हरियाणवी संस्कृति का भव्य संगम, शकुन्तला-दुष्यन्त सांग ने बांधा समां
 

हरियाणवी संस्कृति हमारी पहचान और स्वाभिमान की है आत्मा : हनुमान कौशिक 
हरियाणवी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है सांग महोत्सव : रामधन शास्त्री
 
भिवानी, 15 जून : जिला के गांव उमरावत स्थित सूर्यकवि पंडित लखमीचंद सांस्कृतिक भवन में म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के तत्वावधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक की अध्यक्षता में सोमवार को सांस्कृतिक महोत्सव का शुभारम्भ वैदिक यज्ञ-हवन एवं महान कवियों की प्रतिमाओं के अनावरण के साथ हुआ। यह जानकारी देते हुए संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता रामधन शास्त्री ने बताया कि स्वामी वैदिक देव हरिद्वार द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय एवं संस्कृतिमय हो उठा। कार्यक्रम में सूर्यकवि दादा लखमीचंद परिवार, कवि चंद्रलाल बादी, तत्वज्ञानी चंद्रगौड़ समिति, आजाद कवि मुंशीराम जांडली समिति, महान कवि चंदगीराम सांजरवास कमेटी, महान कवि केदारमल फतेहपूरी कमेटी तथा महान कवि गुणीसुखीराम कमेटी सहित अनेक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं ने भाग लिया। इस दौरान लोकगायक रणबीर बडवासनी, अमित समचाना, मुनीगर पावड़ा, अशोक मरीची, धर्मेंद्र मुरलीपुर, लोक गायक जगबीर कारोरिया तथा अन्य लोक कलाकार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन भी अत्यंत प्रभावशाली रहा।
      समारोह का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध सांगी बाबू दानसिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत ऐतिहासिक सांग शकुन्तला-दुष्यन्त रहा। सांग में भारतीय संस्कृति, प्रेम, त्याग, सत्य एवं मर्यादा के आदर्शों को हरियाणवी लोकशैली में जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के अभिनय, संवाद अदायगी और लोकधुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बलवीर वाल्मीकि, फूलपति धर्मपत्नी महाशय दयाचंद मायना, राकेश भरानिया तथा कविराज महेंद्र बिलोटिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम हरियाणवी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।
     इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति हमारी पहचान और स्वाभिमान की आत्मा है। सांग, लोकगीत और महान कवियों की वाणी हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे बचाना और आगे बढ़ाना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संगठन गांव-गांव जाकर संस्कृति जागरण का अभियान चला रहा है और भविष्य में भी ऐसे भव्य आयोजन लगातार किए जाएंगे। संगठन के प्रवक्ता रामधन शास्त्री ने बताया कि महोत्सव में आसपास के गांवों एवं गुहांड क्षेत्र से भारी संख्या में संस्कृति प्रेमी पहुंचे। उन्होंने कहा कि जनता के उत्साह ने यह साबित कर दिया कि हरियाणवी लोकसंस्कृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुडऩे के लिए उत्साहित है। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सदस्यगण एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं संस्कृतिप्रेमी उपस्थित रहे।