भिवानी में बाल श्रम के खिलाफ बड़ा एक्शन
भिवानी :
शहर में बाल मजदूरी की कुप्रथा पर लगाम कसने के लिए प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर एक बड़ा सर्च अभियान चलाया। बचपन बचाओ आंदोलन के प्रदेश समन्वयक पुनीत शर्मा के नेतृत्व में जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और जिला टास्क फोर्स ने शहर के विभिन्न बाजारों और दुकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान कुल 5 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है।
यह जानकारी देते हुए सीडब्लयूसी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि जिला टास्क फोर्स ने शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने पाया कि कई दुकानों पर कम उम्र के बच्चों से मजदूरी कराई जा रही थी। रेस्क्यू किए गए बच्चों में एक बच्चा बालिक भी मिला। सीडब्ल्यूसी भिवानी के चेयरमैन एडवोकेट प्रदीप सिंह तंवर ने इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बच्चों का स्थान कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि स्कूलों में है। बाल श्रम ना केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह एक मासूम का भविष्य अंधकार में धकेलता है।
हमने रेस्क्यू किए गए बच्चों को संरक्षण में ले लिया है और उनकी काउंसलिंग की जा रही है। वही अभियान के दौरान कानून का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी ढाबे, दुकान या वर्कशॉप पर बाल श्रमिक पाया गया, तो मालिक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
बचपन बचाओ आंदोलन के प्रदेश समन्वयक पुनीत शर्मा ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और चाईल्ड लेबर एक्ट के उल्लंघन के तहत 4 दुकानदारों के खिलाफ सहायक श्रम आयुक्त को एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भेज दी गई है। पुनीत शर्मा ने कहा कि बचपन बचाओ आंदोलन का लक्ष्य हर बच्चे को सुरक्षित बचपन देना है।
उन्होंने बताया कि टीम ने लेबर विभाग और पुलिस के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि दोषियों को बख्शा न जाए। हम जिला प्रशासन के साथ मिलकर भिवानी को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अभियान के दौरान सीडब्ल्यूसी के अन्य सदस्य सतेंद्र तंवर, नीलम रानी, दिनेश अत्री, एडवोकेट धीरज सैनी भी मौजूद रहे।