- सीबीएलयू में पढऩे वालों को शीघ्र मिलेगा मीठा नहरी पानी
- 5.53 करोड़ रूपये की लागत से निर्माधीन परियोजना अंतिम चरण मे
- कुलगुरू दीप्ति धर्माणी ने नहरी पानी पंप हाउस निर्माण कार्य का किया शुभारंभ
- कुलगुरू दीप्ति धर्माणी ने नहरी पानी पंप हाउस निर्माण कार्य का किया शुभारंभ
Jun 2, 2026, 17:12 IST
भिवानी, 02 जून। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय द्वारा निगाणा फीडर पर पंप हाउस निर्माण आरंभ कर दिए जाने के साथ ही विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, गैर शिक्षकों व अभिभावकों के लिए मीठे नहरी पानी का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
5.53 करोड़ रूपये की लागत से तैयार होने वाली इस पेयजल परियोजना के पंप हाउस निर्माण कार्य का शुभारंभ स्वयं कुलगुरू प्रो. दीप्ति धर्माणी, कुलसचिव डॉ. भावना शर्मा व इंजनियरिंग विंग के अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। यह परियोजना लगभग 2 से 3 महिनों में बनकर तैयार हो जाएगी।
परियोजना के तहत निगाणा फीडर की 33300 आरडी पर एक पंपिंग स्टेशन बनाया जा रहा है। जहां से विश्वविद्यालय के जलघर तक 2300 मीटर लंबी 300 एमएम की पाईप लाईन डाली जाएगी। विश्वविद्यालय स्थित जलघर में 3 टैंक बनाए जा रहे हैं, जिनमें 7500 केएल क्षमता का कच्चे पानी का टैंक, 1500 केएल का स्वच्छ पानी का भूमिगत् टैंक व 230 केएल क्षमता का अग्निश्मन टैंक शामिल हैं। इन टैंकों का निर्माण कार्य भी जोरों पर जारी है।
इस अवसर पर बोलते हुए कुलगुरू दीप्ति धर्माणी ने पूरी परियोजना के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व सिचाई मंत्री श्रुति चौधरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि निगाना फीडर पर पंपिंग स्टेशन बनने से सीधा मीठा नहरी पानी विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचेगा और वहां जलघर के माध्यम से जलापूर्ति संभव होगी।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल विश्वविद्यालय में रिहायशी स्थानों का निर्माण आरंभ हो सकेगा बल्कि विश्वविद्यालय में पढऩे वाले हजारों छात्र- छात्राओं को भी इसका लाभ मिलेगा। इस परियोजना के शुरू होने से लंबे समय से विश्विद्यालय की लंबित पेयजल समस्या का हल निकलेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय के प्रेम नगर परिसर मेें स्थानांतरित होने के बाद से अब तक पेयजल के लिए वैकल्पिक व अस्थाई व्यवस्था के सहारे काम चल रहा था। यहां तक की विश्वविद्यालय में टैंकरों व कैंपरों से पेयजल आपूर्ति होती रही है।
प्रो. धर्माणी ने कहा कि पेयजल संबंधित समस्या दूर होने के बाद विश्वविद्यालय के ढांचागत्त विकास को भी पंख लगेंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में पेयजल एवं अन्य जल आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। यह निर्णय उच्च शिक्षा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
5.53 करोड़ रूपये की लागत से तैयार होने वाली इस पेयजल परियोजना के पंप हाउस निर्माण कार्य का शुभारंभ स्वयं कुलगुरू प्रो. दीप्ति धर्माणी, कुलसचिव डॉ. भावना शर्मा व इंजनियरिंग विंग के अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। यह परियोजना लगभग 2 से 3 महिनों में बनकर तैयार हो जाएगी।
परियोजना के तहत निगाणा फीडर की 33300 आरडी पर एक पंपिंग स्टेशन बनाया जा रहा है। जहां से विश्वविद्यालय के जलघर तक 2300 मीटर लंबी 300 एमएम की पाईप लाईन डाली जाएगी। विश्वविद्यालय स्थित जलघर में 3 टैंक बनाए जा रहे हैं, जिनमें 7500 केएल क्षमता का कच्चे पानी का टैंक, 1500 केएल का स्वच्छ पानी का भूमिगत् टैंक व 230 केएल क्षमता का अग्निश्मन टैंक शामिल हैं। इन टैंकों का निर्माण कार्य भी जोरों पर जारी है।
इस अवसर पर बोलते हुए कुलगुरू दीप्ति धर्माणी ने पूरी परियोजना के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व सिचाई मंत्री श्रुति चौधरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि निगाना फीडर पर पंपिंग स्टेशन बनने से सीधा मीठा नहरी पानी विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचेगा और वहां जलघर के माध्यम से जलापूर्ति संभव होगी।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल विश्वविद्यालय में रिहायशी स्थानों का निर्माण आरंभ हो सकेगा बल्कि विश्वविद्यालय में पढऩे वाले हजारों छात्र- छात्राओं को भी इसका लाभ मिलेगा। इस परियोजना के शुरू होने से लंबे समय से विश्विद्यालय की लंबित पेयजल समस्या का हल निकलेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय के प्रेम नगर परिसर मेें स्थानांतरित होने के बाद से अब तक पेयजल के लिए वैकल्पिक व अस्थाई व्यवस्था के सहारे काम चल रहा था। यहां तक की विश्वविद्यालय में टैंकरों व कैंपरों से पेयजल आपूर्ति होती रही है।
प्रो. धर्माणी ने कहा कि पेयजल संबंधित समस्या दूर होने के बाद विश्वविद्यालय के ढांचागत्त विकास को भी पंख लगेंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में पेयजल एवं अन्य जल आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। यह निर्णय उच्च शिक्षा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।