Chaudhary Bansi Lal University: सीबीएलयू में NEP 2020 के तहत तकनीक-समर्थ शिक्षा, छात्रों को मिला उन्नत सर्वेक्षण तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव
चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (CBLU) भिवानी में एम.एससी. भूगोल एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स के छात्रों के लिए DGPS, GPR और Total Station का 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सीबीएलयू में भूगोल एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स विद्यार्थियों के लिए उन्नत सर्वेक्षण उपकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
भिवानी, 05 अगस्त। चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी के भूगोल विभाग, पृथ्वी, पर्यावरण एवं अंतरिक्ष विज्ञान संकाय द्वारा एम.एससी. भूगोल एवं एम.एससी. जियोइन्फॉर्मेटिक्स के विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय उन्नत सर्वेक्षण उपकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ पवन कुमार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक भू-स्थानिक सर्वेक्षण तकनीकों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना तथा अनुसंधान एवं अकादमिक गतिविधियों में उन्नत सर्वेक्षण तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को टोटल स्टेशन, डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) एवं ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) जैसी उन्नत सर्वेक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उपकरणों के मूल सिद्धांत, संचालन प्रक्रिया, फील्ड डेटा संग्रहण, भू-स्थानिक मापन तकनीक तथा सर्वेक्षण डेटा के पोस्ट-प्रोसेसिंग एवं विश्लेषण की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट निर्धारण, उच्च सटीकता वाले भू-स्थानिक डेटा अधिग्रहण तथा उपसतही संरचनाओं के अध्ययन की तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने आधुनिक भू-स्थानिक शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक सर्वेक्षण प्रयोगशाला स्थापित की है, जिसमें टोटल स्टेशन, डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) एवं ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) जैसे उन्नत उपकरण उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को नवीनतम सर्वेक्षण तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जो उनके शैक्षणिक विकास एवं शोध क्षमता को सुदृढ़ करेगा।
कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कौशल आधारित एवं तकनीक समर्थ शिक्षा को प्रोत्साहित कर रहा है। आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण गतिविधियों में समावेश विद्यार्थियों को अनुसंधान, योजना निर्माण, पर्यावरण अध्ययन, आपदा प्रबंधन एवं अन्य बहुविषयक क्षेत्रों में नवीन संभावनाओं के लिए तैयार करेगा।