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Janmashtami Celebration in DAV School: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर सजी झांकियां, प्रधानाचार्या जगदीप कौर ने दिए संदेश

डी.ए.वी. शताब्दी पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मनाया गया श्री कृष्ण जन्मोत्सव। बच्चों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम।
 

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर डी.ए.वी. शताब्दी पब्लिक स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

डी.ए.वी. शताब्दी पब्लिक स्कूल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भव्य एवं मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या जगदीप कौर द्वारा गायत्री मन्त्र उच्चारण से किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनकी लीलाओं पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण एवं राधा की मनमोहक वेशभूषा में सजकर सभी का मन मोह लिया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत श्रीकृष्ण जन्म, रासलीला, माखन चोरी एवं गोवर्धन लीला ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भजन, गीत, नृत्य एवं लघु नाटिका के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों एवं उनके संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पूरे विद्यालय का वातावरण भक्तिमय एवं उल्लासपूर्ण हो गया।

प्रधानाचार्या जगदीप कौर ने विद्यार्थियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सत्य, धर्म, कर्म, प्रेम, मित्रता एवं कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से श्रीकृष्ण के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। नन्हें-नन्हें बाल गोपाल व राधा की वेषभूषा में सजे हुए बच्चों को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे सम्पूर्ण विद्यालय कृष्णमय होकर वृदांवन बन गया हो। छोटे-छोटे बच्चों ने आज श्री कृष्ण के विभिन्न अवतारों के बारे में चित्रण करते हुए यह पर्व पूरी आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं। वे कभी यशोदा मैया के लाल होते हैं, तो कभी ब्रज के नटखट कान्हा। 

विद्यालय की प्राचार्या जगदीप कौर ने जन्माष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि श्री कृष्ण जन्माष्टी पर्व पर हमें यह जानना चाहिये कि श्री कृष्ण जी वेद भक्त व उसके अनुयायी थे। उनका कोई सिद्धान्त, मान्यता व कार्य वेद विरुद्ध नहीं था। वह ईश्वर के भक्त व उपासक थे और इसी कारण वह योगेश्वर कहलाये। जन्म लेने, सुख-दुःख का भोग करने व मृत्यु को प्राप्त होने के कारण वह ईश्वर से भिन्न उन्नत व श्रेष्ठ जीवात्मा थे। श्री कृष्ण जी के समय में सर्वत्र एक ही धर्म वैदिक धर्म का प्रचलन, पालन व प्रसार था। उन्होंने अपने जीवन में अन्याय का विरोध किया और अन्याय पीड़ितों का साथ ही नहीं दिया अपितु उन्हें न्याय दिलाया। अंहिसा व हिंसा की दृष्टि से देखें तो वह ऐसे महात्मा थे जो प्राणीमात्र के अहित की बात सोच भी नहीं सकते थे। विचार, सिद्धान्त व वेद निष्ठा की दृष्टि से श्री कृष्ण व स्वामी दयानन्द जी में कहीं कोई अन्तर नहीं था। इसी लिए उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश में श्री कृष्ण जी के बारे में कहा है कि ‘श्रीकृष्ण का गुण, कर्म, स्वभाव और चरित्र श्रेष्ठ व महान पुरुषों के सदृश है। हमें कृष्ण जी के वैदिक स्वरुप व शिक्षाओं को ही मानना चाहिये और वेदों के विपरीत उनके नाम पर प्रचलित व उनसे जुड़ी सभी प्रकार की अनुचित व निन्दित बातों व परम्पराओं का त्याग करना चाहिये।

यही हमें श्रीकृष्ण जी के जीवन व वेदों का सन्देश समझ में आता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर हमें कृष्ण जी जैसा बनने का संकल्प लेना चाहिये। इस अवसर पर जयबीर सिंह, रजनी बजाज, सुनीता देवी, राजेश कुमार, संगीता वर्मा, राजेश शर्मा, अमिता परूथी, अर्चना, रितु अन्दानी, मोनिका शर्मा, दीप्ति हंस, लक्ष्मी असीजा, राजबाला, प्रियंका, रीना, नीतु महत्ता, आनन्दी, निकिता, सविता, संजु, प्रिया, रूकमणी, मोनिका, नीरज, विक्रम, सोनिया सरदाना, सानिया शर्मा, रितु, प्रीतम सिंह, वीना, उर्मिला आदि सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहें। कार्यक्रम के अंत में सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक मजबूत किया।