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जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया ने किया जेल का औचक निरीक्षण 

 

भिवानी।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-कम-सचिव पवन कुमार ने शुक्रवार को स्थानीय जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल परिसर के विभिन्न हिस्सों में जाकर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कैदियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं।
उन्होंने सबसे पहले जेल प्रशासन से जेल की मौजूदा स्थिति, कैदियों की संख्या, सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली।

इसके बाद न्यायाधीशों ने बैरकों का दौरा करते हुए कैदियों से उनकी आवश्यकताओं, स्वास्थ्य स्थिति, खाद्य प्रबंध और कानूनी सहायता की उपलब्धता को लेकर बातचीत की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया ने कहा कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा उन कैदियों के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है जो आर्थिक, सामाजिक अथवा पारिवारिक परिस्थितियों के कारण निजी वकील उपलब्ध नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि लीगल सर्विस कमेटी मिशन मोड में कार्य कर रही है, ताकि जेलों में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों को नि:शुल्क, प्रभावी और त्वरित कानूनी सहायता उपलब्ध हो सके।
सेशन जज डीआर चालिया ने कहा कि विधिक सेवाएं प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कैदी को न्याय की कमी या संसाधनों के अभाव में हानि न उठानी पड़े। निरीक्षण के दौरान सेशन जज डी.आर. चालिया ने जेल की बैरकों में साफ-सफाई की स्थिति को और बेहतर करने के निर्देश दिए।

विशेष रूप से शौचालयों व स्नानघरों की स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार जल्द से जल्द करने का आदेश दिया। सर्दी के मौसम को देखते हुए कैदियों को स्वच्छ पेयजल, गर्म कपड़े, कंबल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं न बढ़ें, इसके लिए सतर्कता जरूरी है।
शिक्षा व कौशल विकास पर विशेष बल
सेशन जज ने जेल के पुस्तकालय और अध्ययन कक्षों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि कैदियों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि रिहाई के बाद वे रोजगार पा सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रम कैदियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि समाज में पुन: शामिल होने की उनकी क्षमता भी मजबूत होगी।
निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने जेल के रसोईघर का भी दौरा किया और कैदियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, सफाई और पोषण स्तर की जांच की।

उन्होंने भोजन में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने और मानकों के अनुसार ही भोजन तैयार करने को कहा। अधिकारियों ने जेल सुपरिंटेंडेंट और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि कैदियों के हित में सुधारात्मक कदम समयबद्ध तरीके से लागू किए जाएं तथा उनकी नियमित निगरानी भी की जाए। इस अवसर पर डीएलएसए, जेल स्टाफ, एलएडीसी सदस्य मौजूद रहे।