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भिवानी के पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह का निधन, मेदांता में ली अंतिम सांस

भिवानी के पूर्व सांसद और 1962-65 युद्ध के वीर सिपाही चौधरी जंगबीर सिंह का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन। जानें उनके संघर्षपूर्ण जीवन और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।

 

हरियाणा  : भिवानी के पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह का गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

बीजेपी नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी इस पर ट्वीट कर कहा कि परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे। ॐ शांति।

चौधरी जंगबीर सिंह का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और लगभग 7 वर्षों तक देश की सेवा की। वर्ष 1962 में चीन के साथ युद्ध और 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उन्होंने एक सिपाही के रूप में अग्रिम पंक्ति में रहकर देश की रक्षा की।

सेना से सेवा निवृत्त होने के बाद उन्होंने जनसेवा का मार्ग चुना और राजनीति में सक्रिय हो गए। वे आम जनता की आवाज बनकर उनके हकों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई बड़े नेताओं को कड़ी चुनौती दी। वर्ष 1967 और 1968 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने तोशाम विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के खिलाफ चुनाव लड़ा। इन दोनों चुनावों में वे बेहद कम अंतर से हार गए—1967 में करीब 275 वोटों से और 1968 में लगभग 575 वोटों से।

उनकी लोकप्रियता और जनाधार का परिणाम था कि वर्ष 1991 में वे भिवानी से सांसद चुने गए और संसद में क्षेत्र की आवाज बुलंद की। आपातकाल के दौरान भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहां वे 19 माह और 10 दिन तक हिसार जेल में रहे।

चौधरी जंगबीर सिंह के निधन से न केवल भिवानी बल्कि पूरे हरियाणा ने एक जुझारू नेता और सच्चे जनसेवक को खो दिया है। उनके समर्थकों और परिजनों में गहरा शोक है। उनके अंतिम संस्कार की जानकारी जल्द साझा की जाएगी।