धाान की खरीद प्रतिवर्ष 15 सितंबर से शुरू करवाए सरकार : गुरनाम सिंह चंढूनी
भिवानी :
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यख गुरनाम सिंह चंढूनी ने कपास पर लगाए गए 11 प्रतिशत आयात शुल्क वापिस लिए जाने की मांग करते हुए चेतावानी दी कि यदि यह शुल्क अगले 10 दिनों में वापिस नहीं लिए गए तो राज्य स्तर पर प्रत्येक जिला में भारतीय किसान यूनियन प्रदर्शन करने पर मजबूर होगी।
उन्होंने कहा कि कपास पर आयात शुल्क 11 प्रतिशत लगने से कपास के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे आ गए है। इससे कपास का किसान बर्बाद हो जाएगा तथा कपास उत्पादक किसानों की आत्महत्याएं बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह अमेरिका तथा उद्योगपतियों के प्रभाव में किया है।
कपास पर लगाए गए आयात शुल्क को हटाकर 11 प्रतिशत से 0 प्रतिशत किए जाने की मांग तथा अध्यापिका मौत मामले में दर्ज किए गए मुकदमों को रद्द करने की मांग को लेकर चंढूनी ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को मांगपत्र भी सौंपा। इसके उपरांत गुरनाम सिंह चंढूनी ने स्थानीय जाट धर्मशाला में किसानों की बैठक को संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन चंढूनी के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य ने किया।
इस मौके पर गुरनाम सिंह चंढूनी ने कहा कि धान की खरीद राज्य सरकार 15 सितंबर से करे। अक्सर यह खरीद एक अक्तूबर से होती है। उन्होंने कहा कि अब धान की 90 व 85 दिन में तैयार होने की फसले आ गई है। पहले फसलों के तैयार होने में संैकड़ों दिन लगते थे। ऐसे में प्रति वर्ष धान की खरीद राज्य सरकार 15 सितंबर से करना शुरू करे।
चंढूनी ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने यह मांग भी की कि डीएपी व यूरिया को पोर्टल के माध्यम से ना बांटकर खुले में बांटा जाए, ताकि किसान परेशानी से बच सकें। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनिया तीन-तीन साल तक बीमा के पैसे अटकाए रखती है तथा उन पर करोड़ों रूपयों का मुनाफा कमाती है। ऐसे में खराबे के एक माह में क्लेम देने का कानून बनाया जाए तथा प्रतिदिन के हिसाब से बीमा कंपनियों को फसल बीमा का पैसा रोकने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाए।
फसलों के अधिक उत्पादन को लेकर अत्याधिक पेस्ट्रीसाईड व खादों का प्रयोग करने के चलते खाद्य पदार्थो की गुणवत्ता खराब होने को लेकर किसानों पर लगाए गए आरोप का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि आज देश के किसान 6 गुणा तक पेस्ट्रीसाईड डालते है। इससे उनके खर्चे भी 6 गुणा तक बढ़े है तथा अधिकत्तर खाद-बीज की दुकानों पर मिलने वाली दवाईयों में से 60 प्रतिशत दवाईया नॉट रिकमेंडेड होती है।
उन्होंने कहा कि इन सबके लिए सरकार का कृषि विभाग जिम्मेवार है। कृषि विभाग के मात्र 25 प्रतिशत कर्मचारी कार्य कर रहे है। जबकि प्राईवेट कंपनियों के लोग किसानों के बीच जाकर गैर जरूरी दवाईयों का प्रचार करके किसानों को अत्याधिक पेस्ट्रीसाईड व खाद डालने के लिए तैयार कर लेते है। इसके लिए उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों व कंपनियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया।
वही गुरनाम सिंह चंढूनी ने पैट्रोल कंपनियों द्वारा 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाए जाने की शुरूआत किए जाने के सवाल पर कहा कि इसको लेकर किसानों को कोई ऐतराज नहीं है। क्योंकि विभिन्न देशों में एथेनॉल पैट्रोल में मिलाया जाता है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल का उत्पादन कृषि उत्पादों से ही होता है। इस नियम का किसानों को आने वाले समय मे कोई नुकसान नहीं होगा।
इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन चंढूनी के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य ने कहा कि कपास पर लगाए गए 11 प्रतिशत आयात से किसानों को सीधे रूप से नुकसान होगा तथा पहले से आर्थिक मार झेल रहा किसान और भी बर्बादी की कगार पर पहुंचेंगा।
ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह किसानों की तरफ ध्यान देते हुए आयात शुल्क को हटाए। इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारी प्रधान कर्म सिंह मथाना, प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस, संगठन सचिव हरपाल सुढल, युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना, यमुनानगर प्रधान संजू गुदियाना, करनाल अजय राणा, नरेंद्र पंचकुला, बिंद्र सिरसा, जगबीर फतेहाबाद, सत्यवान नरवाल, समय सिंह रेवाड़ी, अंजू जींद, ममता कादयाण झज्जर, नवीन दादरी, रंगलाल महेंद्रगढ़, अशोक लठवाल सोनीपत, कमल प्रधान, नरेश श्योराण, सोमबीर दुहन भिवानी युवा जिलाध्यक्ष, कृष्ण कलाल माजरा कुरुक्षेत्र, गुरनाम सिंह फरल कैथल, मलकित सिंह अंबाला प्रधान, रुपीन्द्र कौर करनाल महिला प्रधान भी मौजूद रहे।