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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का हल्लाबोल
 

बिजली निजीकरण, एग्री डिस्कॉम व स्मार्ट मीटरों के खिलाफ फूटा बिजली कर्मचारियों का गुस्सा, तीन दिवसीय यूनिट स्तरीय प्रदर्शन शुरू
 
 

सरकार ने मांगें नहीं मानी तो 11 से होगी तीन दिवसीय राज्यव्यापी महाहड़ताल : राज्य प्रधान बिजेंद्र बराड
बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियरों की सरकार को दो टूक : स्मार्ट मीटर योजना रद्द हो और जोखिम भत्ता मिले 7 हजार


भिवानी, 03 अगस्त :  हरियाणा सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र के निजीकरण, एग्री डिस्कॉम के गठन, प्राइवेट पैरेलल लाइसेंस जारी करने और स्मार्ट मीटर योजना को थोपने के विरोध में हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार से 5 अगस्त तक चलने वाले तीन दिवसीय यूनिट स्तरीय विरोध प्रदर्शनों का शंखनाद किया गया है, जिसके तहत प्रदेश भर की सभी यूनिटों में प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं और किसानों व उपभोक्ताओं के साथ मिलकर कन्वेंशन किए जा रहे हैं। इसके तहत हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने स्थानीय सिटी डिवजीन में प्रदर्शन किया तथा सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मोर्चा का मुख्य लक्ष्य आगामी 11, 12 व 13 अगस्त को होने वाली तीन दिवसीय राज्यव्यापी महा-हड़ताल को पूर्ण रूप से सफल बनाना है, 
जिसके लिए कर्मचारियों और आम जनता के बीच व्यापक स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है। प्रदर्शन की अध्यक्षता मोंटी, मनोज, रविंद्र यादव दिनोद ने की तथा संचालन राजेश दुल्हेड़ी, अनिल कादमा, अजीत ने किया। 
      प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं इंजीनियर एसोसिएशन व एससी-बीसी यूनियन के राज्य प्रधान बिजेंद्र बराड़, आल हरियाणा पॉवर कारपोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य उपप्रधान राजेश सांगवान, राज्य ऑडिटर धर्मबीर सिंह भाटी, सचिव लोकेश, राज्य कमेटी सदस्य चांदराम, राज्य कमेटी सदस्य विजय जांगड़ा, सर्कल सचिव अशोक गोयत, हरियाणा स्टेट इलैक्ट्रिीसिटी बोर्ड यूनियन भिवानी के सर्कल सचिव मनोज बल्लू बामला, उपप्रधान मोंटी और सह सचिव अनिल कादमा, कर्मचारी महासंघ के प्रदेश उपप्रधान सूरजमल लेघां, तोशाम सब यूनिट के प्रधान मनीष कालीरामन, परमानंद शर्मा ने संयुक्त बयान जारी कर सरकार पर तीखे हमले किए। 
      कर्मचारी नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार हरियाणा एग्री डिस्कॉम बनाकर और निजी कंपनियों को पैरेलल लाइसेंस देकर सार्वजनिक बिजली तंत्र को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। सरकार की ये नीतियां न केवल बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के रोजगार और भविष्य को अंधकार में धकेल रही हैं, बल्कि प्रीपेड व स्मार्ट मीटरों के जरिए आम उपभोक्ताओं तथा किसानों पर भी बिजली बिलों का भारी आर्थिक बोझ लादने का काम करेंगी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी बंद नहीं की और न्यायोचित मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आंदोलन और विकराल रूप लेगा। 
      उन्होंने बताया कि तय शेड्यूल के अनुसार 3 से 5 अगस्त के यूनिट स्तरीय प्रदर्शनों के बाद 6 से 8 अगस्त तक सभी सब-डिवीजन स्तर पर विरोध प्रदर्शन और गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसके बाद 10 अगस्त को किसान मोर्चा व ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय प्रदर्शन में भाग लिया जाएगा। इसके उपरांत 11, 12 व 13 अगस्त को संपूर्ण हरियाणा में तीन दिवसीय पूर्ण कामबंद हड़ताल की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व बिजली निगम प्रबंधन की होगी। वक्ताओं ने सभी कच्चे-पक्के कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसानों और आम उपभोक्ताओं से एकजुट होकर बिजली क्षेत्र को बचाने के इस साझा संघर्ष में बढ़-चढक़र भाग लेने का आह्वान किया।
     उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में हरियाणा एग्री डिस्कॉम के गठन को रद्द करना, गुरुग्राम व नूंह में प्राइवेट पैरेलल लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर रोक लगाना, स्मार्ट मीटर योजना को बंद करना और बिजली निगमों के शेयरों की बाजार या स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग तथा टीबीसीबी (टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग) परियोजनाओं को तत्काल बंद करना शामिल है। इसके साथ ही, कर्मचारियों ने लगातार हो रही दुर्घटनाओं के मद्देनजर 7 हजार रूपये प्रति माह जोखिम भत्ता देने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, एनपीएस से रिटायर्ड कर्मचारियों को मेडिकल सुविधाएं देने, और कोर्ट के आदेशानुसार सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने तथा पक्का होने तक समान काम समान वेतन लागू करने की पुरजोर मांग की है। वहीं, निगमों में खाली पड़े पदों पर लोड व कनेक्शन के हिसाब से नियमित भर्तियां करने, आदर्श ऑनलाइन तबादला नीति रद्द करने, बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए नए थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने, सभी कर्मचारियों को एक हजार यूनिट फ्री बिजली देने, एक्स-ग्रेसिया पॉलिसी से शर्तें हटाने, जोखिम भरी सेवा व सुरक्षा का पूरा प्रबंध करने तथा एससी के लिए 20 प्रतिशत और बीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ लंबित बैकलॉग भरने जैसी मांगों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।
     इस अवसर पर श्रवण कुमार, विनोद कुमार, रमेश यादव, सुदर्शन, सुरेंद्र खेड़ी बूरा, पवन धनाना, विनोद तालु, कुलदीप शर्मा तालु, बिजेंद्र बवानीखेड़ा, विजेंद्र गिल, शमशेर सिंह, अशोक साहनी, धीरज, रामचंद्र यादव, सुखबीर, मनदीप फौगाट, अजीत, मनोज ने भी प्रदर्शन को संबोधित किया।