Haryana News: बाल देखभाल संस्थानों में CCTV को लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने बाल देखभाल संस्थानों के CCTV नियमों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। 15 दिन में मांगी रिपोर्ट।
संस्थानों देखभाल संस्थानों में हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशों की पालना जरूरी: तृप्ति श्योराण
बाल देखभाल संस्थानों में सीसीटीवी के इस्तेमाल को लेकर आयोग सख्त, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
निजी मोबाइल और लैपटॉप से सीसीटीवी जोडऩे पर प्रतिबंध, फुटेज साझा करने पर भी रोक
भिवानी, 17 अक्टूबर। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने प्रदेश के सभी बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर वैधानिक निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, संबंधित अधिकारियों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को 15 दिन के भीतर अनुपालना रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
तृप्ति श्योराण ने आदेशों में कहा है कि आयोग द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया कि कई बाल देखभाल संस्थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से जोड़ा गया है। इससे कैमरों की लाइव तस्वीरें और रिकॉर्डिंग कहीं से भी देखी, डाउनलोड या प्रसारित की जा सकती हैं, जिससे बच्चों की निजता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
केवल अधिकृत कर्मचारियों को मिलेगी पहुंच
आयोग परामर्श के अनुसार, सीसीटीवी व्यवस्था, उसकी रिकॉर्डिंग आदि पर केवल संस्थान के प्रभारी का नियंत्रण रहेगा। पहुंच केवल अधिकृत कर्मचारियों को दी जाएगी और साझा कूटशब्दों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। सीसीटीवी को निजी मोबाइल फोन या लैपटॉप से जोडऩा प्रतिबंधित होगा तथा दूरस्थ पहुच की सुविधा सामान्य रूप से बंद रखनी होगी। आयोग ने सीसीटीवी की तस्वीरें खींचने, पर्दे की रिकॉर्डिंग करने, फुटेज डाउनलोड करने, उसकी नकल बनाने या उसे व्हाट्सऐप, सामाजिक माध्यमों और ईमेल के जरिए प्रसारित करने पर भी रोक लगाई है। डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर को सुरक्षित स्थान पर रखना होगा। इसी प्रकार से बच्चों की निजता को ध्यान में रखते हुए शौचालय, स्नानघर और कपड़े बदलने वाले स्थानों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आयोग ने इसे किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के नियम 67(12) का अनिवार्य प्रावधान बताया है। प्रत्येक संस्थान को सीसीटीवी व्यवस्था तक पहुँच रखने वाले अधिकृत उपयोगकर्ताओं का रिकॉर्ड और फुटेज निकालने का रजिस्टर रखना होगा।
आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी रिकॉर्डिंग के उपयोग, भंडारण और साझा करने पर प्रभावी नियंत्रण भी जरूरी है। निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य संस्थानों में सुरक्षा और बच्चों का संरक्षण होना चाहिए, न कि उनकी गतिविधियों या ठिकाने की जानकारी अनधिकृत लोगों तक पहुचाना। आयोग ने यह परामर्श बच्चों के सर्वोत्तम हितों तथा उनकी निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा के उद्देश्य से जारी किया है।