दमकल कर्मियों की भूख हड़ताल का 9वां दिन
समान कार्य के लिए समान सम्मान और सुरक्षा की मांग का संघर्ष कर रहे है कर्मचारी : सुमेर सिंह आर्य
भिवानी, 03 मई : प्रदेश में दमकल विभाग के कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी जायज मांगों और शहीदों को सम्मान दिलाने की लड़ाई लड़ रहे फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की हड़ताल रविवार को 26वें दिन में प्रवेश कर गई, जबकि क्रमिक भूख हड़ताल का 9वां दिन रहा। सरकार की कथित संवेदनहीनता से गुस्साए सर्व कर्मचारी संघ के जिला पदाधिकारियों ने खुद कमान संभालते हुए भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया। रविवार को धरने की शुरुआत भावुक और जोश भरे माहौल में हुई। कामरेड ओमप्रकाश ने भूख हड़ताल पर बैठने वाले पदाधिकारियों को फूल-मालाएं पहनाकर उनके संघर्ष को नमन किया। इस दौरान भूख हड़ताल पर सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुमेर सिंह आर्य, जिला सचिव धर्मवीर भाटी, राज्य सचिव अशोक पिलानिया, सह सचिव जोगेंद्र सिंह पिलानिया व देवेंद्र श्योराण बैठेरू।
धरने को संबोधित करते हुए जिला वरिष्ठ उप प्रधान सूरजभान जटासरा ने सरकार की दोहरी नीति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने फरीदाबाद अग्निकांड का जिक्र करते हुए कहा कि फरीदाबाद में आग बुझाते समय फायर कर्मचारी भवीचंद शर्मा और रणवीर सिंह ने शहादत दी, साथ ही एक पुलिसकर्मी भी शहीद हुआ। सरकार ने पुलिसकर्मी को एक करोड़ रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी और शहीद का दर्जा दिया, जो सराहनीय है। लेकिन फायर कर्मचारियों के लिए केवल 20 लाख रुपये का प्रावधान। क्या उनकी जान की कोई कीमत नहीं है, यह भेदभाव दमकल विभाग के मनोबल को तोडऩे वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फायर ब्रिगेड की नौकरी पुलिस से भी अधिक जोखिम भरी है, फिर भी उन्हें न तो उचित जोखिम भत्ता मिलता है और न ही शहादत के बाद सम्मान।
दमकल कर्मियों के समर्थन में अब नगर पालिका कर्मचारी संघ, किसान और मजदूर संगठन भी एकजुट हो गए हैं। इस एकजुटता का असर अब सडक़ों पर दिखने लगा है। जिसके चलते नगर पालिका कर्मचारियों की हड़ताल अनिश्चितकालीन होने से शहरों की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। दमकल सेवाओं के प्रभावित होने से जान-माल के नुकसान का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। धरने को कामरेड ओमप्रकाश, अशोक गोयत, अजय श्योरान जिला प्रधान, फायर ब्रिगेड, राजेश, अभिषेक भाटी, नरेंद्र सिंह, सुनील कुमार, रवि कुमार, उमेश राठी, गौरव, गोविन्द, जवाहर लाल, सुमेर सिंह, प्रेम और बजरंग लाल जैसे कई प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया और कर्मचारियों के हक की लड़ाई को अंतिम सांस तक लडऩे का संकल्प दोहराया। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने जल्द ही हठधर्मी छोडक़र मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस मौके पर सकसं जिला प्रधान सुमेर सिंह आर्य ने कहा कि सरकार की खामोशी यह दर्शाती है कि उसे कर्मचारियों के खून और पसीने की कोई कद्र नहीं है। हम कोई भीख नहीं मांग रहे, हम समान कार्य के लिए समान सम्मान और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। जब तक हमारे शहीद साथियों को न्याय नहीं मिलता और हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह भूख हड़ताल और प्रदर्शन थमेगा नहीं।