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नांदेह साहिब यात्रा का सुखद अनुभव : जीवनभर याद रहेगा नांदेड़ साहिब गुरुद्वारे में चखा प्रसाद स्वरूप लंगर
 

- नांदेड़ साहिब से लौटे तीर्थयात्रियों ने साझा किए अपने सुखद अनुभव
 
 
भिवानी, 21 मई। महाराष्ट्र स्थित सिखों के पांचवें पवित्र तख्तों में से एक नांदेड़ साहिब गुरुद्वारे में जिला से दर्शन करने गए 29 श्रद्धालु 20 मई की रात करीब 12.00 बजे वापस भिवानी रेलवे स्टेशन पहुंचे। सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का आभार जताते हुए कहा कि इस तीर्थ यात्रा से वे धन्य और निहाल हो गए। उनके जीवन की यह सबसे अनुपम धार्मिक यात्रा रही है। यात्रियों ने अपने सुखद अनुभव सांझा करते हुए कहा कि नांदेड़ गुरुद्वारे में प्रसाद स्वरूप चखे लंगर के साथ-साथ यात्रा के दौरान रेल में मिला स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन हमेशा याद रहेगा।
उल्लेखनीय है कि गोदावरी नदी के किनारे बसा शहर नांदेड़ हजूर साहिब सचखंड गुरूद्वारे के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। वर्ष 1708 में सिक्खों के दसवें तथा अंतिम गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने प्रिय घोड़े दिलबाग के साथ अंतिम सांस ली थी। यह गुरुद्वारा उसी स्थान पर ही बनाया गया है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सिरसा से पांच मई को एक विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर नांदेड़ साहिब के लिए रवाना किया था, जिसमें भिवानी से 29 श्रद्धालु गए थे। नांदेड़ साहिब गुरुद्वारे के दर्शन कर 20 मई की रात करीब 12.30 बजे श्रद्धालु भिवानी मुख्य रेलवे स्टेशन पहुंचे।
श्रद्धालुओं से जैसे ही उनकी यात्रा के अनुभव के बारे में पूछना चाहा तो उससे पहले ही बोल उठे कि नांदेड़ साहिब दर्शन कर वे धन्य हो गए। सभी श्रद्धालुओं ने एकसाथ मुख्यमंत्री श्री सैनी का आभार जताया। श्रद्धालु कुसुंभी निवासी ओमपाल चौहान, बवानीखेड़ा निवासी हरबंसकौर और चरणजीत सिंह, स्थानीय शांति नगर निवासी रामकिशन और डीसी कॉलोनी निवासी महावीर प्रसाद ने बताया कि सचखंड श्री हजूर साहिब, नांदेड़ शहर में गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े 8 गुरुद्वारे हैं, जिनको उनको दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इन गुरूद्वारों में मुख्य गुरूद्वारा के अलावा गुरुद्वारा माता साहिब कौर, शिखर घाट / शुकराना साहिब, हीरा घाट साहिब, माल टेकरी साहिब, नगीना घाट, बांदा घाट साहिब/बाबा बंदा सिंह बहादुर व लंगर साहिब गुरूद्वारा शामिल हैं।
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-श्रद्घालुओं ने बताई आठ गुरुद्वारों की महता
श्रद्घालुओं ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना अंतिम कीर्तन दरबार यहीं मुख्य गुरुद्वारे में सजाया था। दूसरा गुरुद्वारा माता साहिब कौर जी का है, यहां पर गुरु जी ने खालसा पंथ की माता का दर्जा दिया था। यहीं उनका निवास स्थान था। यहां माता जी का चोला, बर्तन और निशानियां रखी हैं, जहां महिलाएं मन्नत मांगती हैं। तीसरा गुरुद्वारा शिखर घाट / शुकराना साहिब है, यहां पर गुरु जी ने अपने तीर-कमान, तलवार गोदावरी में समर्पित की थी। शुकराना यानि शुक्रिया अदा किया था।
चौथा गुरुद्वारा हीरा घाट साहिब है, जहा पर गुरु जी को एक हीरा भेंट हुआ था जो उन्होंने यहीं संगत में बांट दिया। पांचवा गुरुद्वारा माल टेकरी साहिब है यानि धन, इस स्थान पर गुरु जी के लंगर के लिए संगत माल-धन लाती थी। आज भी यहां पर 24 घंटे लंगर चलता है। छठा गुरुद्वारा नगीना घाट है, यहां पर गुरु जी का एक नगीना जड़ा कंगन नदी में गिर गया था। यहां नदी का पानी नगीने जैसा साफ माना जाता है। यहां स्नान करने से असाध्य बीमारियां ठीक होती हैं। सातवां गुरुद्वारा बांदा घाट साहिब/बाबा बंदा सिंह बहादुर है, यहां पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने माधो दास बैरागी को अमृत छकाकर बंदा सिंह बहादुर बनाया था। उनको पांच तीर, निशान साहिब और हुक्मनामा देकर पंजाब भेजा था। यहीं से मुगलों के खिलाफ जंग की शुरुआत हुई थी। आठवां गुरुद्वारा लंगर साहिब के नाम से है, यहां पर गुरु जी का मुख्य लंगर चलता था। गुरु जी खुद संगत को लंगर छकाते थे।
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-याद रहेगा गुरुद्वारे का लंगर और रेल में मिला स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन
यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने बताया कि नांदेड़ साहिब में चखा लंगर हमेशा याद रहेगा। इसके साथ ही यात्रा के दौरान रेल में नाश्ते में मिला पोहा, पकोड़ा, समोसा, चाय, दही, पराठा, और दोपहर तथा रात के भोजन में मिलेे दाल, चावल, रोटी, पनीर व आलू की सब्जी मिक्स वेज, रायता, गुलाब जामुन, रसगुल्ले का स्वाद याद रहेगा। श्रद्घालुओं ने बताया कि नांदेड़ साहिब जाते और आते समय ट्रेन में अन्य श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक चर्चाएं व कीर्तन किया।