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सडक़ों पर कचरा, तंत्र बेबस : नगर परिषद कर्मचारियों की हड़ताल 7वें दिन भी जारी, सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग

ठेका प्रथा खत्म करने के नाम पर एचकेआरएनर बनाकर कर्मचारियों के साथ किया छल : दानव
 
 

भिवानी, 06 मई : हरियाणा की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों के सफाई कर्मचारियों की प्रदेश स्तरीय हड़ताल बुधवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गई। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर जारी इस आंदोलन ने प्रदेश की सफाई व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि शहरों में हर तरफ गंदगी के अंबार लगे हैं, जिससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।


     भिवानी नगर परिषद के बाहर चल रहे धरने पर कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि सरकार और संघ के बीच कई दौर की वार्ताएं तो हुईं, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य रहे। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव पुरूषोत्तम दानव ने विभिन्न ब्लॉकों का दौरा कर कर्मचारियों के मनोबल को धार दी। बवानीखेड़ा में धरनारत्त कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन की नहीं, बल्कि हमारे आत्मसम्मान और सुरक्षा की है।  बवानीखेड़ा धरने पर ऋषि, प्रदीप दरोगा, सोनू कोषाध्यक्ष, सुमन, पिंकी, अनूप और अजय सहित भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक सुर में संकल्प लिया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, झाड़ू नहीं उठेगा।


     हड़ताल के सातवें दिन तक पहुंचते-पहुंचते शहरों की सूरत बिगड़ चुकी है। मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं। डस्टबिन ओवरफ्लो हो रहे हैं और सडक़ों पर फैली गंदगी से महामारी फैलने का डर सताने लगा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि जनता को होने वाली इस असुविधा की सीधी जिम्मेदार हरियाणा सरकार है, जो कर्मचारियों की जायज मांगों को अनसुना कर रही है।


     पुरूषोत्तम दानव ने सरकार के दावों की पोल खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए कि वर्ष 1997 से लेकर 2026 तक सफाई और सीवर कर्मचारियों की कोई नई पक्की भर्ती नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ठेका प्रथा खत्म करने के नाम पर सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनर) बनाकर कर्मचारियों के साथ छल किया है। यही नहीं पिछले 40 वर्षों में आबादी और क्षेत्रफल कई गुना बढ़ गया, लेकिन नए पद सृजित नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों में दैनिक वेतन भोगी और अनुबंधित कर्मचारियों को 2 वर्ष की पॉलिसी बनाकर पक्का किया जाए, सफाई, सीवर और फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को 5,000 रुपये मासिक जोखिम भत्ता मिले, कच्चे कर्मचारियों को भी पक्के कर्मचारियों की तरह चिकित्सा प्रतिपूर्ति और ग्रेच्युटी मिले, पुरानी पेंशन योजना को तुरंत बहाल किया जाए, 8 अप्रैल से हड़ताल पर चल रहे अग्निशमन कर्मियों की मांगों का समर्थन और शहीद कर्मचारियों (रणवीर व भवीचन्द) के परिवारों को 1-1 करोड़ की सहायता राशि दी जाए।