पर्यावरण संरक्षण के लिए 75 वर्ष पुराने पेड़ों को बचाने की सरकार की अनूठी औऱ कारगर पहल : संदीप कुमार एसडीएम
प्रदेश सरकार देगी वार्षिक 3000 रुपये पैंशन : एसडीएम संदीप कुमार
May 13, 2026, 15:40 IST
तोशाम, 13 मई।
एसडीएम संदीप कुमार ने बताया कि हरियाणा सरकार की प्राण वायु देवता पेंशन योजना के तहत 75 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों के मालिकों को पेंशन दी जा रही है। सरकार की यह पर्यावरण संरक्षण के लिए 75 वर्ष पुराने पेड़ों को बचाने की सरकार की अनूठी औऱ कारगर पहल है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य पुराने पेड़ों को कटने से बचाना और लोगों को इनके संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। जिन लोगों के पास 75 साल पुराने पेड़ हैं। उनके मालिको को पेशन दी जायेगी।
संदीप कुमार ने बताया कि उपमंडल में जिस पंचायत औऱ पेड़ के मालिक की ओर से प्रशासन को पत्र मिलेगा ,
उस गांव में 75 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों की जानकारी देनी होंगी । इस योजना के तहत पात्र पेड़ मालिकों को हर साल 3000 हजार आर्थिक सहायता दी जाएगी। एसडीएम ने बताया कि पेड़ों को चिह्नित करने के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई जाएगी, टीम मौके पर पहुंचकर पेड़ो की उम्र की जांच पड़ताल करेगी। पेड़ों की उम्र गणितीय व अनुमान के आधार पर निकाली जायेगी। बुजुर्गों व स्थानीय लोगों से पेड़ कीजानकारी भी ली लायेगी, यह पेड़ कब लगाया गया। उन्होंने बताया कि पेड़ की मोटाई और बढ़ने की चाल के आधार पर भी उम्र निकल जाती है। दूसरे ज्यादा दिक्कत आने पर ड्रिल का प्रयोग कर तने के छल्लों के आधार पर भी उम्र का आकलन किया जाता है। पेड़ मालिको को इसकी जानकारी जिला उपायुक्त कार्यालय में देनी होगी। सत्यापन के बाद पात्र पेड़ों को योजना में शामिल किया जाएगा।
हरियाणा सरकार अब 75 साल या उससे अधिक पुराने पेड़ों के संरक्षण करने वालों को सालाना 3000 रुपये की पेंशन दे रही है। इस योजना का उद्देश्य पुराने पेड़ों को कटने से बचाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत जिन लोगों की
जमीन या परिसर में 75 साल से अधिक पुराने पेड़ हैं, वे जिला वन विभाग या उपायुक्त कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। पात्र पेड़ों की जांच के बाद राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। हरियाणा सरकार की 75 वर्षीय पेड़ पेंशन योजना को अब क्षेत्र में भी लोगों को भा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस पहल को प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा कदम मान रहे हैं। पंचायतें भी पुराने पेड़ों की पहचान कर प्रशासन को जानकारी भेज सकती है। इससे पेड़ों की कटाई रुकेगी और पुराने विरासत पेड़ों का संरक्षण होगा।
एसडीएम संदीप कुमार ने बताया कि हरियाणा सरकार की प्राण वायु देवता पेंशन योजना के तहत 75 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों के मालिकों को पेंशन दी जा रही है। सरकार की यह पर्यावरण संरक्षण के लिए 75 वर्ष पुराने पेड़ों को बचाने की सरकार की अनूठी औऱ कारगर पहल है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य पुराने पेड़ों को कटने से बचाना और लोगों को इनके संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। जिन लोगों के पास 75 साल पुराने पेड़ हैं। उनके मालिको को पेशन दी जायेगी।
संदीप कुमार ने बताया कि उपमंडल में जिस पंचायत औऱ पेड़ के मालिक की ओर से प्रशासन को पत्र मिलेगा ,
उस गांव में 75 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों की जानकारी देनी होंगी । इस योजना के तहत पात्र पेड़ मालिकों को हर साल 3000 हजार आर्थिक सहायता दी जाएगी। एसडीएम ने बताया कि पेड़ों को चिह्नित करने के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई जाएगी, टीम मौके पर पहुंचकर पेड़ो की उम्र की जांच पड़ताल करेगी। पेड़ों की उम्र गणितीय व अनुमान के आधार पर निकाली जायेगी। बुजुर्गों व स्थानीय लोगों से पेड़ कीजानकारी भी ली लायेगी, यह पेड़ कब लगाया गया। उन्होंने बताया कि पेड़ की मोटाई और बढ़ने की चाल के आधार पर भी उम्र निकल जाती है। दूसरे ज्यादा दिक्कत आने पर ड्रिल का प्रयोग कर तने के छल्लों के आधार पर भी उम्र का आकलन किया जाता है। पेड़ मालिको को इसकी जानकारी जिला उपायुक्त कार्यालय में देनी होगी। सत्यापन के बाद पात्र पेड़ों को योजना में शामिल किया जाएगा।
हरियाणा सरकार अब 75 साल या उससे अधिक पुराने पेड़ों के संरक्षण करने वालों को सालाना 3000 रुपये की पेंशन दे रही है। इस योजना का उद्देश्य पुराने पेड़ों को कटने से बचाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत जिन लोगों की
जमीन या परिसर में 75 साल से अधिक पुराने पेड़ हैं, वे जिला वन विभाग या उपायुक्त कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। पात्र पेड़ों की जांच के बाद राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। हरियाणा सरकार की 75 वर्षीय पेड़ पेंशन योजना को अब क्षेत्र में भी लोगों को भा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस पहल को प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा कदम मान रहे हैं। पंचायतें भी पुराने पेड़ों की पहचान कर प्रशासन को जानकारी भेज सकती है। इससे पेड़ों की कटाई रुकेगी और पुराने विरासत पेड़ों का संरक्षण होगा।