हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने सांसद धर्मबीर सिंह को सौंपा ज्ञापन
भिवानी:
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान अजीत राठी व जिला सचिव सुमेर आर्य ने भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद चौ. धर्मबीर सिंह को मांगपत्र सौंपते हुए मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से पूर्ण छूट प्रदान की जाए।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक सितंबर 2025 के निर्णय (सिविल अपील संख्या 1385/2025) में कहा है कि टीईटी अब उन शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य है जो 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त हुए थे, जबकि एनसीटीई ने पहले ऐसे शिक्षकों को पूर्ण छूट प्रदान की थी।
अब नए निर्णय के चलते हरियाणा के हजारों वरिष्ठ शिक्षक जिनमें अधिकांश 15 से 30 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, नौकरी समाप्ति या पदोन्नति रुकने के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नियम को पूर्व प्रभाव से लागू करने से शिक्षकों में अत्यधिक मानसिक तनाव, भय और असुरक्षा पैदा हो गई है।
इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अभूतपूर्व कमी का संकट उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को शून्यकाल, विशेष उल्लेख, ध्यानाकर्षण या निजी सदस्य विधेयक के माध्यम से उठाया जाए। आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 23 में तत्काल संशोधन कर 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को स्थाई छूट प्रदान की जाए।
प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री व संसदीय स्थायी समिति (शिक्षा) के समक्ष यह मुद्दा मजबूती से उठाया जाए। आवश्यक होने पर सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे, ताकि वरिष्ठ शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। अजीत राठी व सुमेर आर्य ने कहा कि समय रहते यह कदम उठाए जाने से हरियाणा सहित पूरे देश के हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित होगा और स्कूल शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहेगी।