हरियाणा मौसम अपडेट: 6 जून तक बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट; गर्मी से राहत
हरियाणा में दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से 6 जून तक बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की संभावना। भीषण गर्मी से मिली राहत, जानें मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान।
चंडीगढ़: हरियाणा में 28 मई के बाद हुई बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत दी है. मई के अंतिम सप्ताह तक जहां प्रदेश का अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं बारिश के बाद यह घटकर करीब 39 डिग्री सेल्सियस रह गया है. सोमवार को अधिकतम तापमान में रविवार की तुलना में 1.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन यह अब भी सामान्य से 4.4 डिग्री कम बना हुआ है.
दो पश्चिमी विक्षोभ बदलेंगे मौसम: मौसम वैज्ञानिक डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार प्रदेश में दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहे हैं. पहला पश्चिमी विक्षोभ 2 जून की रात से प्रभाव दिखाना शुरू करेगा, जबकि दूसरा 4 जून को पहाड़ी क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा. इन दोनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से राज्य में मौसम लगातार परिवर्तनशील बना रहेगा.
6 जून तक बारिश और तेज हवाओं की संभावना: मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मंगलवार रात से लेकर 6 जून तक हरियाणा के अधिकांश जिलों में तेज हवाएं चल सकती हैं. इसके साथ गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी और कई स्थानों पर मध्यम से तेज बारिश होने के भी आसार हैं. हालांकि इस अवधि में दिन के तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. मौसम विभाग ने किसानों और आम नागरिकों को मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है.
सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक हुई बारिश: मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से 31 मई तक हरियाणा में कुल 52.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में औसत वर्षा 44.6 मिलीमीटर रहती है. इस प्रकार प्रदेश में सामान्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अब होने वाली वर्षा को मानसूनी गतिविधियों की शुरुआती कड़ी माना जाएगा, क्योंकि जून से सितंबर तक मानसून का मौसम रहता है.
23 साल में 13 बार कमजोर रहा मानसून: पिछले 23 वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि हरियाणा में मानसून कई बार उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. वर्ष 2014 सबसे कमजोर मानसून वाला साल रहा, जब केवल 200.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई, जो सामान्य से 57 प्रतिशत कम थी. इसके अलावा 2012 में 40 प्रतिशत और 2019 में 42 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई. वर्ष 2013 में मानसून सबसे पहले 16 जून को पहुंचा था, जबकि 2004 में सबसे देर से 8 जुलाई को दस्तक दी थी. इसके बावजूद दोनों वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी.