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हरियाणा मौसम: 17 जिलों में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट, गर्मी से मिली राहत

हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ के चलते 17 जिलों में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट। तापमान में 9 डिग्री तक गिरावट। किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह।
 

चंडीगढ़: हरियाणा में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. प्रदेश में समय से पहले मानसून जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग ने बुधवार को 17 जिलों में आंधी और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. विशेषज्ञों के अनुसार 20 जून तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल रही है.

17 जिलों में बारिश की संभावना: मौसम विभाग के अनुसार सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल और महेंद्रगढ़ सहित 17 जिलों में आज आंधी और बारिश की संभावना है. विभाग का अनुमान है कि इन जिलों में करीब 25 प्रतिशत तक वर्षा होने के आसार हैं. वहीं अगले 24 घंटे बाद बारिश की गतिविधियों में और तेजी आ सकती है.

बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित: मंगलवार को गुरुग्राम, सोनीपत, हिसार, महेंद्रगढ़, हांसी, कैथल, रोहतक, भिवानी, रेवाड़ी और फतेहाबाद सहित 10 जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई. हांसी में जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. फतेहाबाद के सरकारी अस्पताल में पानी घुस गया, जबकि सिरसा के गांव जोगीवाला में पशु डेयरी की छत गिरने से 21 गाय और भैंसें मलबे में दब गईं.

तापमान में 9 डिग्री तक गिरावट: लगातार बादल छाए रहने और बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. हिसार और नारनौल में दिन का तापमान सामान्य से लगभग 9 डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुंच गया. कई क्षेत्रों में दिन का तापमान 30 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया, जिससे मौसम सुहावना बना रहा. रात के तापमान में भी कमी आई है और नारनौल में न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.

किसानों के लिए विशेष सलाह: मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए फिलहाल सिंचाई तथा कीटनाशकों के छिड़काव से बचने को कहा गया है. किसानों को कटी हुई फसल और अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखने, तिरपाल से ढकने तथा खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है. वहीं सब्जियों और बागवानी फसलों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा मजबूत करने की भी अपील की गई है.