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मनुष्य तीन तरीके से अपने कर्म बनाता है मनसा वाचा और कर्मणा-सतगुरु कंवर साहेब

 

भिवानी ।

जन्मदिवन का तो बहाना है इंसान के जीवन का सबसे बड़ा दिन तो वो है जिस दिन उसे संतो की संगत मिले और सत्संग के बहाने से परमात्मा का गुणगान करने का मौका मिले । अपने सर्वस्व को गुरु को अर्पण कर दो।जन्मदिवस सांसारिक उमंग या खुशी का दिन तो है लेकिन उससे बढ़कर ये चिंतन का दिन होता है।

चिंतन का इसलिए क्योंकि हमारे अनमोल जीवन का एक और वर्ष कम हो चला है।यह सत्संग वचन परम संत सतगुरु कंवर साहेब जी महाराज ने भिवानी के रोहतक रोड पर स्थित राधास्वामी आश्रम में फरमाया।हुजूर महाराज जी अपने 79वें जन्मदिवस पर संगत को सत्संग वचन परोस रहे थे।उलेखनीय है कि 2 मार्च को राधास्वामी सत्संग दिनोद के हुजूर कंवर साहेब जी महाराज का जन्मदिवस होता है।

संगत इस दिन को बड़े हर्षोउल्लास से मनाती है।इस अवसर पर साध संगत ने पहले चरण में हुजूर महाराज जी का जन्मदिवस मनाया और दूसरे चरण में गुरु महाराज जी ने सत्संग  फरमाया।सत्संग फरमाते हुए हुजूर कंवर साहेब जी ने फरमाया कि दिन प्रतिदिन हमारी सांस घंट रही है इसलिए अपने अगत की चिंता करो।लम्बा जीवन आवश्यक नहीं है बल्कि योग्य जीवन आवश्यक है।यदि दो दिन का जीना भी नेकी का काम करवा दे तो लंबे जीवन का क्या करना।हुजूर ने कहा की मनुष्य तीन तरीके से अपने कर्म बनाता है मनसा वाचा और कर्मणा।

मन से किसी का अहित ना करो वचन से किसी को बुरा मत बोलो और कर्म करो तो परोपकार और भलाई के करो।जिस माया के आडंबरों में हम अपना सुख ढूँढ कर उन्हें जोड़ते हैं वो तो सब यहीं रह जाएँगे।जाएगा सिर्फ़ आपके गुरु की शरण में बिताये पल।वो आपने किया नहीं इसलिए अब आप माथा पीटते हो की महापुरषों ने संतों ने हमें कितनी चेतावनी दी थी लेकिन हम नहीं चेते।उन्होंने कहा कि जिस देश में हम रहते हैं वो हमारा देश नहीं है ये तो अंगारों की भट्ठी हैं जिसमे हम जल जाने वाले थे लेकिन संतों ने देश धार कर हमें इस अग्नि से बचा लिया।वो काल कोठरी में फाँसी रूहो को आज़ाद कराने आते हैं लेकिन काल जीवो को अपने चक्र में जकड़े रखता है।ये सुखकारी लगने वाले दुख संताप परमात्मा ने नहीं बनाए ये सब तो काल की रचना है।लेकिन हैरानी है इसके लिए हम दोष परमात्मा के सिर मढ़ते हैं।

हुजूर ने चेताते हुए कहा कि आपको मानुष देह मिली है तो उसके लायक काम भी करो।ये जन्म संतो की संगत के लिए मिला था फिर दुर्जन के संग से इसे क्यों जाया कर रहे हो।मत भूलो कि आप जो आज बो रहे हो कल आप वही काटोगे।इंसान होकर इंसानीयत को मत भूलो। हुजूर कँवर साहेब जी ने कहा कि जन्म दिन कैसा।क्योंकि बाहरी तौर पर तो हम जन्मदिन की खुशी मना सकते हैं लेकिन ये भी कटु सत्य है कि हर जन्मदिन पर हमारा एक और मूल्यवान वर्ष व्यर्थ चला गया।अब भी चेतने का समय है।चेतो और सन्त सतगुरु से अपने कर्म काटने की युक्ति सुझो।हुजूर महाराज जी ने कहा की इंसान स्वार्थी और मतलबी है।हम तो गंगा गए तो गंगादास हो गए और जमुना गए तो जमुनादास हो गए।

सामर्थ्य हासिल किया नहीं लेकिन चाहते हो सब कुछ ।मत भूलो प्रकृति का नियम है कि फर्स्ट डिज़र्व देन डिजायर।परमात्मा भी सुपात्र को ही देता है ना कि कुपात्र को।रूह के लिए खुराक चाहते हो तो उस ईएसटी पर चलो जो गुरु ने हमें बताया।उन्होंने मूलमंत्र देते हुए फ़रमाया कि गुरु जो करे वो कभी नहीं करना चाहिए गुरु जो कहे वो हमेशा करना चाहिए।बिना करनी के भक्ति संभव नहीं है।करनी वो जो वास्तव में करना चाहिए।छाज की भांति बनो जो पिछोड़ा कर के थोथे को तो उड़ा देता है और सार को अपने पास रख लेता है।

मन को वश में करना है तो गुरु धारण करना पड़ेगा।हुजूर महाराज जी ने सामाजिकता परोसते हुए चेताया कि हम ऋषियों के देश के बेटे जहाँ सत्य अहिंसा परोपकार और परमार्थ हमारे मूल में थे।क्या कारण है कि संस्कारों की धरती पर आज हमें संस्कार ढूँढने पड़ते हैं।बच्चे संस्कारहीन हो रहे हैं युवा पथभ्रष्ट हो रहे हैं।बुजुर्गों का और माँ बाप का आदर और मान नहीं है।

नेकी को पीछे छोड़ दिया।केवल मृत्यु पर तो हमें याद आता है की राम नाम सत्य है लेकिन बाकी समय असत्य के साये में रहते हो।हर पाल परमात्मा को समर्पित रहो।बैठे उठे सोने जागते हर पाल परमात्मा के ख्याल में रहो।ईर्ष्या द्वेष से छुटकारा पा लो।गुरु भक्ति से अपनी रूह पर मोटे बंधनों को काटो और नाम भक्ति करते हुए झीने बंधनों को। गुरु सैदेव आपके साथ है और उनका कमाया नाम सदा आपका सहायी है।कुछ भी त्यागो लेकिन नाम को ना त्यागो।सूर्य की भाँति नाम भी सर्वदेशीय है और सर्वकालिक है।पिछले को भुला दो और आने वाला है उसे संवारो। जो जीवन गुरु का है वही विशेष है अन्यथा कितने ही जन्मदिन मना लो कोई लाभ नहीं मिलने वाला।