Huzur Kanwar Saheb Satsang Bhiwani: जैसी संगत वैसी रंगत – हुजूर कंवर साहेब जी ने दिया स्वतंत्रता दिवस और तीज का संदेश
स्वतंत्रता और हरियाली तीज का संदेश देते हुए हुजूर कंवर साहेब ने कहा—जैसी संगत, वैसी रंगत
अमर बलिदानियों की शहादत को हमारे दिलो में ज़िंदा रखता है स्वंत्रता दिवस
भिवानी, 16 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज के पावन अवसर पर परम संत सतगुरु हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने देशवासियों और समस्त संगत को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान का स्मरण कराता है। हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत बनाने के साथ अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। हरियाली तीज का पर्व प्रकृति, प्रेम, उल्लास और नवजीवन का संदेश देता है। हमें प्रकृति के संरक्षण के साथ अपने मन और विचारों में भी प्रेम, करुणा और सद्भाव की हरियाली पैदा करनी चाहिए।
इसके बाद सत्संग फरमाते हुए हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने कहा कि “जैसी संगत, वैसी रंगत”। मनुष्य जिस प्रकार की संगति करता है, उसके विचार, आचरण और जीवन की दिशा भी उसी के अनुरूप बनती चली जाती है। उन्होंने नक्षत्र की बूंद का उदाहरण देते हुए समझाया कि एक ही बूंद केले के मुख में पड़े तो उसका स्वरूप अलग हो जाता है, सांप के मुख में पड़े तो अलग प्रभाव होता है और सीप में जाकर वही बूंद मोती बन जाती है। बूंद एक थी, लेकिन संगति के अनुसार उसका परिणाम बदल गया। इसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी उसकी संगति से प्रभावित होता है।उन्होंने कहा कि संगत करनी है तो साध की संगत करनी चाहिए। साधु और साध में भी अंतर है। साधु वह है जिसने साधना को साध लिया है, जबकि साध वह है जो अभी अभ्यास के मार्ग पर चल रहा है। आत्मज्ञान की जागृति साध की संगति से होती है। जब आत्मज्ञान जागता है तो मनुष्य का विवेक जागृत होता है और यही विवेक उसे ब्रह्मज्ञान की ओर ले जाता है।हुजूर कंवर साहेब जी ने कहा कि जिस प्रकार जल के संपर्क से शुचिता उत्पन्न होती है, उसी प्रकार साधु की संगति से ज्ञान पैदा होता है। माया की संगति से लोभ और विषय-वासनाओं की संगति से कामना एवं आसक्ति बढ़ती है। इसलिए मनुष्य को यह समझना चाहिए कि जैसी संगति होगी, वैसी ही उसके मन की गति होती चली जाएगी।उन्होंने कहा कि पांच तत्वों से बने इस मानव शरीर में पवित्र रूह का वास है। मनुष्य को यह अनमोल जीवन अपने कर्मों को सुधारने और परमात्मा को जानने के लिए मिला है, लेकिन गलत संगति और विकारों में पड़कर वह अपने जीवन को व्यर्थ गंवा देता है। आवश्यकता है कि मनुष्य अपने आचरण को पवित्र बनाए और अपने भीतर विद्यमान परमात्मा को पहचानने का प्रयास करे।
हुज़ूर कंवर साहेब ने कहा कि जीवन की मूल आवश्यकताएं बहुत सीमित हैं—दो वक्त की रोटी, तन ढकने के लिए कपड़ा और सिर पर छत के लिए मकान। लेकिन मनुष्य आवश्यकता से अधिक संग्रह की दौड़ में इतना उलझ जाता है कि जीवन को सरल बनाने के बजाय स्वयं ही जटिल बना लेता है। अधिक पाने की चाह में वह जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है।उन्होंने संगत को संदेश दिया कि सच्ची स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि लोभ, मोह, अहंकार, विकार और बुरी संगति से मन को मुक्त करना भी है। सत्संग, सेवा, संयम, संतोष और सदाचार को जीवन का आधार बनाकर ही मनुष्य वास्तविक सुख और शांति प्राप्त कर सकता है।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सत्संग का लाभ उठाया तथा स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज की एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। संगत ने देश की एकता, अखंडता, भाईचारे, प्रकृति संरक्षण और सदाचारपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लिया।