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भारत में चांदी का आयात घटा, नई लाइसेंसिंग व्यवस्था से बढ़ी टेंशन

नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के कारण भारत में चांदी का आयात तेजी से कम हुआ है, जिससे लोकल प्रीमियम कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

 

नई लाइसेंसिंग व्यवस्था की वजह से भारत में चांदी का आयात तेज़ी से कम हुआ है. यही कारण है कि लोकल प्रीमियम कई महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा कि ज्यादातर बैंकों को अभी तक इस सफेद धातु के आयात के लिए जरूरी परमिट नहीं मिले हैं और वे सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ ही लोगों को लाइसेंस मिले हैं. भारत दुनिया में चांदी के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, जहां गहनों, चांदी के बर्तनों, औद्योगिक इस्तेमाल और त्योहारों व शादियों के दौरान खरीदारी से इसकी मांग बनी रहती है. घरेलू प्रोडक्शन न के बराबर होने के कारण, यह लगभग पूरी तरह से बैंकों और अन्य अधिकृत संस्थाओं द्वारा विदेशों से मंगाई जाने वाली सप्लाई पर निर्भर है, जिससे इसकी खरीदारी ग्लोबल चांदी की सप्लाई और मांग के संतुलन में एक अहम भूमिका निभाती है.

कितना कम हुआ चांदी का इंपोर्ट

कंसल्टेंसी ‘मेटल्स फोकस’ के अनुसार, देश ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए मई में चांदी के आयात के लिए लाइसेंसिंग की जरूरतें लागू कीं, जिससे जून में शिपमेंट गिरकर अनुमानित 29 टन रह गया, जो जनवरी में 747 टन था. जून का कुल आंकड़ा देश की सालाना चांदी की मांग का 1 प्रतिशत से भी कम होने का अनुमान था. ‘मेटल्स फ़ोकस’ के प्रिंसिपल कंसल्टेंट हर्षल बारोट ने बुधवार को कहा कि सप्लाई में आई इस कमी के कारण अनुमानित 30-दिन का औसत प्रीमियम — यानी बेंचमार्क कीमतों से ऊपर खरीदारों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त रकम — कम से कम 2019 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. मुंबई स्थित गोल्ड ट्रेडिंग फर्म ‘ऑगमॉन्ट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ में रिसर्च हेड रेनीशा चैनानी ने कहा कि आयात रुकने से फिजिकल चांदी की कमी हो गई है, जबकि मांग स्थिर बनी हुई है. उन्होंने कहा कि घरेलू प्रीमियम “कमी वाली स्थिति” के करीब पहुंच रहा है.

उलझन में कारोबारी

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, आयात लाइसेंस को मंज़ूरी देने वाली समिति महीने में केवल एक या दो बार बैठक करती है, जिससे देरी होती है. अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा कि नई व्यवस्था का मकसद थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से चांदी के आयात में तेजी को रोकना है, जिनके साथ भारत के मुक्त-व्यापार समझौते हैं. नई लाइसेंसिंग प्रणाली ने कुछ व्यापारियों को उलझन में डाल दिया है. उन्होंने कहा कि कोटा कैसे आवंटित किया जाता है और उनके खत्म होने पर क्या होता है, इस बारे में बहुत कम स्पष्टता है. सरकार अब ‘सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन’ (उत्पत्ति का प्रमाण-पत्र) भी मांग रही है, जो जरूरत केवल दो महीने पहले ही शुरू की गई थी. भारत के वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार, अब चांदी का आयात ‘प्रतिबंधित आयात’ कैटेगरी में आता है. आयात के अनुरोधों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है.

जब सरकार ने बढाई थी इंपोर्ट ड्यूटी

यह लाइसेंसिंग सिस्टम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के उस फैसले के बाद लागू किया गया है, जिसमें सोने और चांदी पर आयात शुल्क दोगुने से भी ज़्यादा कर दिया गया था. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा की लागत बढ़ गई थी, जिसका असर रुपए और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा था. भारत में खरीदारी के सबसे व्यस्त मौसम (पीक सीजन) से पहले यह समस्या और बढ़ सकती है. आम तौर पर ज्वैलर्स अक्टूबर-नवंबर में आने वाले त्योहारों और नवंबर से मार्च तक चलने वाले शादी-ब्याह के मौसम के लिए जुलाई से ही अपना स्टॉक फिर से भरना शुरू कर देते हैं. ऑगमोंट एंटरप्राइजेज के चैनानी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे शादी-ब्याह के मौसम में खरीदारी बढ़ेगी, हालात और मुश्किल हो सकते हैं.