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नीट पेपर लीक मामले के विरोध में गरजा भारतीय विद्यार्थी मोर्चा, प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
 

नीट पेपर लीक मामला केवल धांधली नहीं, देश की शिक्षा व्यवस्था की हत्या है : जगवीर दहिया
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, सडक़ों पर उतरेगा छात्र समाज : जगवीर दहिया
 
 
भिवानी, 25 मई : देश के लाखों युवाओं के भविष्य और चिकित्सा क्षेत्र की साख से जुड़ी नीट यूजी-2026 परीक्षा में सामने आए पेपर लीक मामले  को लेकर अब देश भर के छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। भारतीय विद्यार्थी मोर्चा ने इस घोटाले के खिलाफ देशव्यापी मोर्चा खोलते हुए सोमवार को शहर में प्रदर्शन कर भिवानी जिला प्रशासन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस पूरे घटनाक्रम और छात्रों में पनप रहे भारी असंतोष को रेखांकित करते हुए भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के प्रदेश प्रभारी जगवीर दहिया ने सरकार और परीक्षा एजेंसियों को आड़े हाथों लिया है।
      प्रदेश प्रभारी जगवीर दहिया ने कहा कि नीट पेपर लीक कोई साधारण प्रशासनिक लापरवाही या अनियमितता नहीं है । यह सीधे तौर पर देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और हमारे करोड़ों वंचित-शोषित वर्ग के छात्रों के सामाजिक न्याय और समान अवसरों पर किया गया एक बड़ा हमला है । सालों-साल दिन-रात एक करके, भूखे-प्यासे रहकर तैयारी करने वाले करीब 22.79 लाख परीक्षार्थी और उनके परिवार आज गहरे मानसिक तनाव, असुरक्षा और भारी आक्रोश में जी रहे हैं । इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि सरकार की नाकामी के कारण कुछ मासूम छात्रों को आत्मघाती कदम उठाने तक के लिए मजबूर होना पड़ा है!
       संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल और पारदर्शी सुधार नहीं होते, वे चुप नहीं बैठेंगे। दहिया ने कहा कि मोर्चा की मांग है कि नीट पेपर लीक प्रकरण की स्वतंत्र और समयबद्ध जाच पूरी होने तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करें और तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। केवल दोबारा परीक्षा करवाना इस मानसिक और आर्थिक प्रताडऩा का हल नहीं है। प्रभावित सभी परीक्षार्थियों को उनके परीक्षा शुल्क का तीन गुना मुआवज़ा दिया जाए ताकि उनकी यात्रा, भोजन और मानसिक क्षति की आंशिक भरपाई हो सके। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट किया जाए । परीक्षा संचालन में निजी अनुबंध प्रणालियों को बंद कर इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकारी संस्थानों को सौंपी जाए। ओएमआर आधारित परीक्षा प्रणाली की सीमाओं और इसमें होने वाली सेंधमारी को देखते हुए तुरंत कंप्यूटर आधारित टेस्ट प्रणाली को लागू किया जाए। पेपर लीक और मानसिक दबाव के कारण जिन होनहार छात्रों की अकाल मृत्यु हुई है, सरकार उनके परिवारों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी तुरंत प्रदान करे। देश में लंबे समय से जारी शिक्षा के निजीकरण और बढ़ती असमानता को रोकने के लिए वन नेशन, वन एजुकेशन, वन सिलेबस, वन फीस जैसी नीति की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
      प्रदेश प्रभारी जगवीर दहिया ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इन मांगों पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर प्रभावी और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय विद्यार्थी मोर्चा देश के तमाम संबद्ध छात्र संगठनों और छात्र-प्रतिनिधियों को साथ लेकर देशव्यापी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, सत्याग्रह और एक बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन छेडऩे के लिए बाध्य होगा। इस अवसर पर हवा सिंह सांगा, कृष्ण सांगा, साहिल सांगा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला संयोजक दीपक जांगड़ा, भारत मुक्ति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश दहिया, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा प्रदेश महासचिव राहुल, सोमबीर चौपड़, सवीन चौपड़ा, विजय कुमार, अनुप मनसरबास, मनोज उमरावत, अक्षय कायला, रामपाल मेहरा, राजू खरक, ग्राम स्वराज किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र तालु, राजमल बहमणी, सतीश मेहरा, हरीश मेहरा, रामचंद्र सभ्रवाल, एकलक्ष्य बिधनोई, सुधीर बिधनोई, महेंद्र बिधनोई, परमवीर, हर्षित सहित अनेक लोग मौजूद रहे।