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निजी बसों में छात्र बस-पास और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एनएसयूआई ने खोला मोर्चा 

 

भिवानी :

एनएसयूआई भिवानी इकाई ने जिला में विद्यार्थियों को पेश आ रही परिवहन समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया।

एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष मंजीत लांगायन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को भिवानी में हरियाणा रोड़वेज व जीएम व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा।

संगठन ने स्पष्ट मांग की है कि जिले की सभी सरकारी, निजी और परमिटधारी बसों में छात्र बस-पास को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
     मांगपत्र के माध्यम से मांग की कि सभी सरकारी, निजी और परमिटधारी बसों में छात्र बस-पास को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए, बस ऑपरेटरों द्वारा कोर्ट स्टे का जो गलत बहाना बनाया जाता है, उस पर प्रशासन रोक लगाए, छात्राओं की सुरक्षा के लिए बसों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था हो, पास ना मानने, ओवरचार्जिंग करने या अभद्रता करने वाले ड्राइवर-कंडक्टरों के परमिट निलंबित या रद्द किए जाएं, हर कॉलेज रूट पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त हो और शिकायतों के निपटान के लिए एक तंत्र विकसित किया जाए।
     ज्ञापन में भिवानी जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों कॉलेज, विश्वविद्यालय, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्रों की व्यथा को उजागर किया गया है।

मनजीत लांग्यान ने आरोप लगाया कि निजी बस संचालक नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे हैं। हरियाणा पैसेंजर ट्रांसपोर्ट स्कीम 2003 का हवाला देते हुए मंजीत लांगायन ने कहा कि निजी बसों में छात्र पास को स्वीकार करना बस ऑपरेटरों की मर्जी नहीं, बल्कि उनका कानूनी दायित्व है। इसके बावजूद धरातल पर छात्रों से पूरा किराया वसूला जाता है और पास दिखाने पर उन्हें बसों में चढऩे नहीं दिया जाता।
     जिला अध्यक्ष मंजीत लांगायन ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा अपनी राजनीतिक रैलियों के लिए तो रोडवेज की बसों का आसानी से उपयोग कर लेती है, लेकिन जब छात्रों को सुविधा देने की बात आती है, तो सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है।

सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के बयान का जिक्र करते हुए लांगायन ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भले ही नायब हो, लेकिन उनकी कलम में छात्रों के हितों के लिए स्याही नहीं बची है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में सरकार ने 150 किलोमीटर तक पास लागू करने का जो दावा किया था, वह भी महज एक चुनावी जुमला साबित हुआ है क्योंकि उसका वास्तविक लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है।
     प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई की छात्रा प्रतिनिधि अंकिता ने छात्राओं के सामने आने वाली चुनौतियों को गंभीरता से रखा। उन्होंने कहा कि वे शिक्षा हासिल करने के लिए घरों से निकलती हैं, लेकिन सफर के दौरान हमें अपमान और भय का माहौल झेलना पड़ता है।

कई बार निजी बसों का स्टाफ छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार करता है और पास नहीं मानता। सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा तो देती है, लेकिन बेटियों को सुरक्षित यात्रा देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
     एनएसयूआई प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह लड़ाई सिर्फ बस पास की नहीं, बल्कि छात्रों के आत्मसम्मान और शिक्षा के अधिकार की है।

संगठन ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई और निजी बसों की मनमानी नहीं रुकी, तो छात्र शक्ति सडक़ों पर उतरकर एक बड़ा और शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। इस अवसर पर रविदास मेहरा, सविता, सागर कांगड़ा, दीक्षा, रीनू, आशीष, मनदीप, रविना, साक्षी, रजनी, राहुल, गौरव सहित अन्य पदाधिकारी व विद्यार्थी मौजूद रहे।