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CJI के हरियाणा दौरे का दूसरा दिन, बरवाला में SDJM कोर्ट का उद्घाटन किया

 

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के हरियाणा दौरे का आज (10 जनवरी) दूसरा दिन है। सुबह वह हिसार के बरवाला पहुंचे।

यहां उन्होंने नवस्थापित एसडीजेएम न्यायालय का उद्घाटन एवं न्यायिक परिसर का शिलान्यास किया। उनका स्वागत करने कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा और रणबीर गंगवा पहुंचे थे।

यहां अपने संबोधन में CJI ने कहा-

ज्युडिशियरी कोर्ट कॉम्पलेक्स की इमारतें तो बन जाएंगी, मगर यह तभी कामयाब होंगी, जब न्याय का खून इनमें दौड़े और इनमें गरीब का दर्द समझने की क्षमता हो।

इसके बाद CJI नारनौंद पहुंचे। यहां भी कोर्ट परिसर का उद्घाटन कर CJI अपने पैतृक गांव पेटवाड़ के लिए निकले हैं। यहां ग्रामीण उनका स्वागत करेंगे। गांव के खेल स्टेडियम में उनके सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया है। इसके अलावा, CJI गांव में अपने स्कूल जाएंगे।

वहीं, हिसार स्थित अपने पुराने कॉलेज गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय में एलुमनी मीट में चीफ गेस्ट के रूप में शामिल होंगे।

यहां जननायक जनता पार्टी (JJP) सुप्रीमो डॉ. अजय चौटाला, पूर्व मंत्री संपत सिंह समेत उनके 12 क्लासमेट और 2 शिक्षक भी इस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

बरवाला में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा- मैं पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट और हरियाणा सरकार को बधाई देता हूं कि यहां दो सब डिवीजन कोर्ट स्थापना हो रही हैं। सोमवार से दोनों जगह कोर्ट शुरू हो जाएंगी।

CJI ने कहा- जब भी हम नई कोर्ट सब डिवीजन पर शुरू करते हैं तो इसका मकसद एक्ससेस टू जस्टिस का है। अभी 4-5 दिन पहले थिंक टैंक का अमेरिका से डेलिगेशन आया था।

उसमें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने कहा कि भारत के संविधान के 226 अनुच्छेद के अनुसार कोई भी फरियादी स्टेट के हाईकोर्ट में जाकर अपने मौलिक अधिकारों के लिए लड़ सकता है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 32 में देने की क्या जरूरत थी? संविधान में इस बात का जोर दिया गया है कि हर प्रदेश में एक हाईकोर्ट होगा। उस हाईकोर्ट को संवैधानिक अधिकार होगा।

चीफ जस्टिस बोले- प्रदेश के लोगों को फंडामेंटल राइट्स को लागू करने के लिए दूरदराज से दिल्ली न आना पड़े। ताकि अपने प्रदेश में उसे वे राइट्स मिल जाएं। इसलिए संविधान में स्टेट के लिए अलग हाईकोर्ट का प्रावधान है। सिविल के मुकदमे सुलझाने के लिए कोर्ट का जो प्रावधान है, वह हर नागरिक को नजदीक मिल सके। जितनी दूर अदालत होगी, उतना ही वह लड़ाई के लिए निराश होगा।