मेलोडी टॉफी का असर: 'नाम के भ्रम' में निवेशकों ने कमाए पैसे, पढ़ें सच
पीएम मोदी के मेलोडी टॉफी भेंट करने के बाद शेयर बाजार में कैसे आया 'पारले इंडस्ट्रीज' के शेयरों में उछाल? जानें क्या है नाम के भ्रम का पूरा सच।
शेयर बाजार में अक्सर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं जब किसी एक खबर या ट्रेंड का सीधा असर कंपनियों के शेयरों पर पड़ता है. हाल ही में एक बेहद दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक तोहफे ने शेयर बाजार के निवेशकों की चांदी कर दी. पिछले महीने इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी ने वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मशहूर टॉफी ‘मेलोडी’ (Melody) भेंट की थी.
मेलोनी द्वारा इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते ही यह तेजी से वायरल हो गया. इस वायरल वीडियो का असर यह हुआ कि शेयर बाजार में ‘पारले इंडस्ट्रीज’ (Parle Industries) के शेयरों की जमकर खरीदारी शुरू हो गई. देखते ही देखते 22 दिनों के भीतर ही इस कंपनी के शेयर ने 116 फीसदी का छप्परफाड़ रिटर्न दे दिया. दिलचस्प बात यह है कि जिस कंपनी के शेयर निवेशकों ने धड़ल्ले से खरीदे, उसका मेलोडी टॉफी से दूर-दूर तक कोई नाता ही नहीं है.
मेलोडी की मिठास से शेयर बाजार में हलचल
इटली में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का वीडियो 20 मई को चर्चा में आया था. ठीक इसी दिन शेयर बाजार में पारले इंडस्ट्रीज का स्टॉक 5 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था. जैसे ही मेलोडी वाली खबर ने बाजार में जोर पकड़ा, इस शेयर में खरीदारी हावी हो गई. अपर सर्किट लगने के साथ यह 5.25 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में इस स्टॉक की मांग इतनी तेजी से बढ़ी कि कुछ ही कारोबारी सत्रों को छोड़ दें, तो इसमें लगातार अपर सर्किट लगने का सिलसिला जारी रहा.
महज तीन हफ्ते में निवेशकों की बंपर कमाई
बाजार में निवेशकों के इस उत्साह का नतीजा यह हुआ कि 11 जून (गुरुवार) को भी इस शेयर में 5 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा. अब यह स्टॉक 10.81 रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है. सीधे शब्दों में कहें तो जिन निवेशकों ने 20 मई को इस शेयर में पैसा लगाया था, उनका निवेश महज 22 दिन में ही दोगुने से भी अधिक हो चुका है. शेयर बाजार के नजरिए से इतने कम समय में 116 प्रतिशत का उछाल आना मल्टीबैगर रिटर्न होता है.
नाम के भ्रम ने बदल दी इस स्टॉक की किस्मत
अब इस पूरी घटना के सबसे हैरान करने वाले पहलू को समझते हैं. निवेशकों ने जिस ‘पारले इंडस्ट्रीज’ के शेयरों में जमकर पैसा लगाया है, वह असल में बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), रियल एस्टेट विकास के साथ-साथ पेपर वेस्ट रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में काम करती है. यह कंपनी मुंबई से संचालित होती है. इसका मेलोडी टॉफी के निर्माण या बिक्री से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है. पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने खुद इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि पारले इंडस्ट्रीज एक पूरी तरह से अलग व्यापारिक इकाई है.
क्या करती है असली मेलोडी बनाने वाली कंपनी?
बाजार में जिस कंपनी के उत्पाद हम पारले-जी (Parle-G), मेलोडी, मोनाको, क्रैकजैक या हाइड एंड सीक के नाम से खरीदते हैं, वह दरअसल ‘पारले प्रोडक्ट्स’ (Parle Products) है. यह देश की एक बहुत बड़ी और प्रतिष्ठित एफएमसीजी (FMCG) कंपनी है, जो फिलहाल शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है. आम निवेशकों को केवल दोनों कंपनियों के नाम में ‘पारले’ शब्द होने की वजह से भारी भ्रम हुआ. बिना कंपनी की पूरी पड़ताल किए उन्होंने शेयर खरीद लिए.