RBI Utkarsh 2.0: आरबीआई ने लॉन्च किया 'उत्कर्ष 2.0', रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
RBI ने जारी किया 'उत्कर्ष 2.0' फ्रेमवर्क। डिजिटल पेमेंट और कस्टमर सर्विस पर रहेगा जोर। रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखते हुए आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी लगाया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ‘उत्कर्ष 2.0’ नाम से एक मिडिम-टर्म का स्ट्रैटिजी फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसमें कई रणनीतिक स्तंभों पर नियम-कानून, ग्राहक-केंद्रितता, समावेशी वित्त, प्रतिस्पर्धी बाज़ार, प्रभावी तकनीक, भविष्य के लिए तैयार संगठन और वैश्विक भारत पर फोकस आदि पर जोर दिया गया है. RBI ने कहा कि यह फ्रेमवर्क नियमों को आसान बनाने, वित्तीय बाज़ारों को गहरा करने और पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा, साथ ही अपने सभी कार्यों में डिजिटलीकरण और नवाचार को भी प्राथमिकता देगा.
कस्टमर सर्विस को बेहतर बनाने पर जोर
आरबीआई के अनुसार यह योजना कस्टमर सर्विस और फाइनेंशियल इंक्लूजन को बेहतर बनाने पर जोर देगी, और इसके साथ ही बाज़ार के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने तथा कीमतों में पारदर्शिता लाने के प्रयासों पर भी ध्यान देती है, विशेष रूप से सरकारी सिक्योरिटीज के मामले में. तकनीक को अपनाने, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आंतरिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण शामिल है, की इसमें केंद्रीय भूमिका निभाने की उम्मीद है. संस्थागत स्तर पर, RBI का लक्ष्य भारत की वैश्विक वित्तीय उपस्थिति का विस्तार करना है. इसमें रुपए के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना और UPI जैसी सीमा-पार भुगतान प्रणालियों का विस्तार करना शामिल है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस ढांचे के तहत हुई प्रगति की समय-समय पर निगरानी की जाएगी, और बदलते वित्तीय हालात के अनुसार इसमें बदलाव करने की गुंजाइश भी रहेगी.
आरबीआई ने किया पॉलिसी रेट का ऐलान
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए बुधवार को नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा. आरबीआई ने इसके साथ सतर्कता बरतते हुए देखो और इंतजार करो की नीति का रुख अपनाया है. चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में लगभग 40 दिन चले युद्ध के कारण कच्चे तेल दाम में उल्लेखनीय तेजी आई है. इससे ईंधन के आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए मुद्रास्फीतिक दबाव बढ़ा है. हालांकि, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध विराम से वैश्विक स्तर पर पुनरुद्धार की उम्मीद भी बंधी है.
इसके साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत से कम है. नई जीडीपी श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) के तहत दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 2025-26 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है.