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- कॉमनवेल्थ गेम्स में  सीबीएलयू की शोधार्थी सीमा कालीरामना का कमाल
 

- शादी के अगले दिन पहुंचीं प्रैक्टिस, कोरोना में भी नहीं छोड़ा एक दिन का अभ्यास, अब जीता कांस्य पदक
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने की 1 लाख रूपये नकद पुरस्कार की घोषणा
 

भिवानी, 31 जुलाई। दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और अथक मेहनत की मिसाल बन चुकी चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी के शारीरिक शिक्षा विभाग की पीएचडी शोधार्थी सीमा कालीरमना ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर कांस्य पदक जीतकर भारत, हरियाणा और विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे विश्वविद्यालय और खेल जगत में खुशी की लहर है। 
विश्वविद्यालय प्रशासन ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए अपनी खेल नीति के तहत सीमा कालीरमन को एक लाख रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। सीमा की सफलता केवल एक पदक जीतने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण की लंबी यात्रा का परिणाम है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत बॉक्सिंग से की थी। उन्होंने अपनी क्षमता को पहचानते हुए डिस्कस थ्रो को चुना। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा और बेहतर निर्णय साबित हुआ और आज उसी खेल में उन्होंने विश्व स्तर पर भारत का तिरंगा बुलंद किया है।
गौरतलब होगा कि वर्ष 2019 में सीमा कालीरमना का विवाह हुआ, लेकिन शादी उनके खेल के रास्ते की बाधा नहीं बनी। डिस्कस थ्रो के प्रति उनका जुनून इतना था कि विवाह के अगले ही दिन वह अभ्यास के लिए मैदान में पहुंच गई थीं। उस दिन घर पर रिश्तेदार और परिचित नवविवाहित जोड़े को बधाई देने आ रहे थे, लेकिन सीमा स्टेडियम में पसीना बहा रही थीं। उनके लिए हर दिन की प्रैक्टिस उतनी ही महत्वपूर्ण थी जितना उनका सपना। 
यही अनुशासन आज उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं की सूची तक लेकर आया। इसके बाद कोरोना महामारी का कठिन दौर आया। पूरे देश में लॉकडाउन लगा, खेल गतिविधियां ठप हो गईं और खिलाड़ी घरों तक सीमित हो गए, लेकिन सीमा ने उस चुनौती को भी अपने इरादों पर हावी नहीं होने दिया। कोरोना काल में भी उन्होंने एक भी दिन अभ्यास नहीं छोड़ा। मैदान उपलब्ध न होने पर उन्होंने घर और आसपास उपलब्ध संसाधनों के सहारे फिटनेस, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और तकनीकी अभ्यास जारी रखा। उनका मानना था कि एक दिन की भी लापरवाही वर्षों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
सीमा के जीवन में विवाह के बाद नई जिम्मेदारियां आईं और बाद में वह एक बेटे की मां भी बनी। इसके बावजूद उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। परिवार, मातृत्व, पीएचडी की पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी इन सभी जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस बनाए रखा। उनकी इस यात्रा में उनके पति रविन्द्र सबसे मजबूत सहारा बने। रविन्द्र केवल उनके जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि उनके कोच भी हैं। 
उन्होंने हर कठिन दौर में सीमा का मार्गदर्शन किया और उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। पति और कोच की इस जोड़ी की मेहनत का ही परिणाम है कि आज सीमा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है।
सीमा वर्तमान में चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी के शारीरिक शिक्षा विभाग से पीएचडी कर रही हैं वे चरखी गांव की बेटी और दिनोद गांव की बहु हैं। खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में उनका उत्कृष्ट प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। सीमा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 
उन्होंने कहा कि सीमा कालीरमना ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे विश्वविद्यालय, हरियाणा और देश का गौरव बढ़ाया है। एक शोधार्थी का विश्व मंच पर भारत के लिए पदक जीतना विश्वविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि सीमा भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी और विष्वविद्यालय का नाम विश्वभर में रोशन करेंगी।
कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं को भी निरंतर प्रोत्साहित करता है। सीमा की उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स का यह कांस्य पदक केवल भारत की खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसी खिलाड़ी की प्रेरणादायक यात्रा का सम्मान है जिसने बॉक्सिंग से शुरुआत की, डिस्कस थ्रो में पहचान बनाई, 2019 में विवाह के अगले ही दिन अभ्यास पर पहुंची, कोरोना काल में एक दिन भी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी, मातृत्व के बाद भी खेल जारी रखा और अपने पति व कोच रविन्द्र के साथ मिलकर विश्व मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाया है।