आदर्श महिला महाविद्यालय में प्रशासनिक लापरवाही से सीवरेज का दूषित जलभराव
भिवानी।
शहर का सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आदर्श महिला महाविद्यालय जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते पिछले कई दिनों से सीवरेज के दूषित जलभराव की समस्या से जूझ रहा है।
ज्ञात रहें कि प्रशासन द्वारा हांसी गेट व साथ लगते आस-पास के क्षेत्रों में सीवरेज की मुख्य लाईन की साफ-सफाई का कार्य चल रहा है, लेकिन इस कार्य के दौरान नियमित्ताओं को अनदेखा कर इसके साथ जुड़ी सीवरेज लाईनों की निकासी पर कोई ध्यान नहीं दिया गया जिस कारण मुख्य लाईन का दूषित जल बैकफ्लों होने से महाविद्यालय में भर गया।
महाविद्यालय द्वारा संबंधित विभागों को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इससे छात्राओं, शिक्षकों और अन्य स्टाफ को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महाविद्यालय परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार व साथ लगती कक्षाओं, महाविद्यालय के प्रशासनिक कार्यालय के आसपास सीवरेज का बदबूदार गंदा पानी जमा होने से महाविद्यालय का वातावरण अस्वच्छ हो गया है।
जिससे बिमारियां फैलने का डर बना हुआ है। महाविद्यालय की शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक गंदे पानी और बदबू के बीच काम करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
इस बाबत महाविद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के महासचिव अशोक बुवानीवाला ने बताया कि महाविद्यालय द्वारा इस समस्या को लेकर नगर परिषद, जनस्वास्थ्य विभाग व उपायुक्त महोदय तक को लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। मगर प्रशासन द्वारा अभी तक कोई समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही महाविद्यालय को भुगतनी पड़ रही है, जहां हजारों छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती है।
अशोक बुवानीवाला ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक तरफ सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर छात्राओं को गंदगी और जलभराव के बीच पढऩे के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह न केवल छात्राओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य से खिलवाड़ है, बल्कि उनके सम्मान के भी खिलाफ है।
इस संबंध में कॉलेज प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे उच्च अधिकारियों तक इस मामले को उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेवारी स्थानीय प्रशासन होगा।