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सिद्धपीठ बाबा नत्थूनाथ महाराज सच्चे मार्गदर्शक थे---महन्त चरणदास  

 

भिवानी 
संतों की अखंड तपस्या का अपना ही महत्व है। भारत देश के संतों की विश्व में अलग ही महत्वता है। सिद्धपीठ बाबा नत्थूनाथ महाराज जी ने 19वीं शताब्दी में कठोर तप कर मानवता की भलाई के लिए काम किया था।

यह विचार आज सिद्ध पीठ बाबा नत्थूनाथ महाराज के विशाल भंडारे में दर्शन करने आए महंत चरणदास महाराज जोहड़ी धाम और महंत जीतनाथ महाराज मंदिर सूरतामाई ने कहे।  संतों ने कहा की देश में महान संतों ने अपनी विचारधारा से सफल जीवन की नींव रखने का मूलमंत्र दिया था।

इसी कड़ी में सिद्ध पीठ बाबा नत्थूनाथ महाराज भी हुऐ। बाबा नत्थूनाथ राजस्थान के बिकानेर से आकर भिवानी के हनुमान गेट स्थित मंदिर का निर्माण करवाया। उन्होंने इस धाम में कठोर तप कर आमजनमानस की दुख तकलीफ़ को दूर किया था आज उनके विशाल भंडारे पर हजारों की संख्या में भक्तों ने दर्शन किये और प्रसाद चखा। सिद्धपीठ बाबा नत्थूनाथ महाराज के बारे में एक कहावत है की यहां कोई खाली हाथ नहीं जाता। 

भंडारे के लिए कोई चंदा नहीं काटा जाता

 यहां आयोजक एडवोकेट सुरेश मेहरा, पवन डेहनीवाल, संतकुमार, राजू मेहरा, सुरेश डी डब्लू, हेडमास्टर बिशनपाल, हेडमास्टर रणसिंह सम्भरवाल आदि ने बताया की भंडारे के लिए कोई पर्ची नहीं काटी जाती बल्कि सेवक अपने आप सामान और जरूरत के सामान अपने आप दे जाते हैं।

विशाल भंडारे में लगभग डेढ़ से दो हजार लोग प्रसाद चक्कर जाते हैं। सेवक के रूप में महिलाओं का विशेष योगदान रहता है वहीं युवा पीढ़ी इस दिन खूब मेहनत करते हैं।
इस मौके पर एडवोकेट सुरेश मेहरा, पवन डेहनीवाल, राजू मेहरा ,संतकुमार बलवीर मेहरा,सरोज जाखड, गुड्डी देवी,सुकन देवी,राजकला,इशवतीं देवी,सुनीता देवी,मोनू मेहरा,अजय तोंदवाल,नवीन, मनदीप,डेविड कुमार, रामचंद्र मेहरा,सोनू कुमार,मोहनी, सत्यनारायण,मधूर,अमन मेहरा,विजय सिंहमार , रमेश सैनी,डा सुरेन्द्र सभ्रवाल, सुरेश मेहरा, एडवोकेट नीर कैलाश सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।।।