{"vars":{"id": "123258:4912"}}

एक अप्रैल से प्रत्येक खेत की सैटेलाइट से की जा रही है निगरानी 

 

भिवानी।

पराली जलाने की घटनाओं के मद्देनजर सेटेलाईट की आधुनिक तकनीक से प्रत्येक खेत की एक अप्रैल से कड़ी निगरानी की जा रही है। यदि कहीं पर गेहूं फसल अवशेष में कोई आग लगाता है तो प्रशासन की नजरों से छिप नहीं सकता।

वहीं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने जिला के न केवल किसानों से बल्कि आमजन से अपील करते हुए कहा है कि वे फसल अवशेषों को किसी भी कीमत पर ना जलाएं।
सहायक कृषि अभियन्ता नसीब सिंह धनखड ने बताया कि भिवानी जिले मे कुल 272 गांव मे 102600 हैक्टर मे गेहूं का क्षेत्र है। गेहूं की कटाई उपरान्त खेतों में बचे हुए फसल अवशेषों में आग लगा दी जाती है, जिसके मध्यनजर डीसी श्री गुप्ता द्वारा जिला स्तर, खण्ड स्तर व गांव स्तर पर पराली प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया जा चुका है, जो निरंतर निगरानी करेंगी।

उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2026 से प्रत्येक खेत की निगरानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से सैटेलाइट द्वारा की जा रही है। यदि कोई भी किसान खेत में फसल अवशेषों में आग लगाता है, तो उसकी सुचना तत्काल कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। पराली जलाने वाला प्रशासन की नजरों से छिप नहीं सकता। कंट्रोल रूम से संबंधित गांव स्तर के अधिकारियों को तुरंत सुचित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- फसल अवशेष में आग लगाई तो किसान नहीं कर सकेगा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण
फसल अवशेषों में आग लगाने पर नियमानुसार चालान (जुर्माना) किया जाएगा। इसके साथ-साथ संबंधित किसान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अधिकार अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है, जिससे वह आगामी दो वर्षों तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पाएगा।
बॉक्स
वहीं दूसरी ओर जिला में गेहूं या अन्य फसल अवशेषों को जलाने की घटनाओं पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाने को लेकर डीसी साहिल गुप्ता ने सभी गांवों में पराली प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया है। जिला मे धारा 163 भी लगाई जा चुकी है।
बॉक्स
- जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों व आमजन से की है पराली नहीं जलाने की अपील

जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों व आमजन से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाएं ताकि भूमि की उर्वरता बनी रहे, वायु प्रदूषण कम हो ओर किसी भी प्रकार की आगजनी की घटना से बचा जा सके। फसल अवशेष जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति कम के साथ-साथ पर्यावरण प्रदुषित होता है। इतना ही नहीं खेतों में आग में मित्र कीट भी जल जाते हैं, जो कि फसल की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।