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'डील' के आरोपों से भड़के सोनम वांगचुक, बोले- 26 दिन भूखा रहने के बाद क्या ईमानदारी साबित करूं?

26 दिनों का अनशन समाप्त करने के बाद अपने ऊपर लग रहे 'डील' के आरोपों पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दर्द और गुस्सा छलका है। उन्होंने वीडियो जारी कर सभी सवालों के बेबाक जवाब दिए हैं।

 

अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि अनशन खत्म करने के बाद अपने ऊपर लग रहे डील के आरोपों से वह बहुत परेशान हैं और थोड़े गम और गुस्से के साथ यह वीडियो बना रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने पूछा कि 26 दिन तक भूखा रहने के बाद क्या मुझे अपनी ईमानदारी साबित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मैं केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अपना अनशन नहीं तोड़ना चाहता था। मैं तो चाहता था कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के ज्यादा से ज्यादा सांसदों, CJP के हमारे छात्र नेताओं और लद्दाख से आए नेताओं की मौजूदगी में मैं अपना अनशन तोड़ने चाहता था। लेकिन मुझसे किसी को नहीं मिलने दिया गया और सबको वापस भेज दिया गया। उन्होंने इस मामले को अदालत में ले जाने की बात कही।

वीडियो की शुरुआत में वांगचुक ने कहा, 'शारीरिक रूप से लड़कर झगड़कर, हड़ताल के अंदर और एक हड़ताल करके जमीन पर लेटकर, जो ताकत 20वें, 22वें दिन मेरे अंदर थी, वह ताकत लगाकर मुझे जबरदस्ती बाहर निकलना पड़ा। आपको नहीं मालूम है।' इसके बाद वीडियो में एक दिन पहले की वह क्लिप आई, जिसमें सोनम वांगचुक बेहद गुस्से में मेदांता अस्पताल के अपने वार्ड से बाहर निकलने की कोशिश करते दिखे, और इस दौरान उन्होंने वहां खड़े एक पुलिस अधिकारी पर नाराजगी जताते हुए कहा, 'उनसे कहिए मुझे गिरफ्तार करिए, मैं एक आजाद नागरिक हूं, ये क्या है, मेरे अनशन के 26वें दिन वो पिछले 3 घंटों से मेरा दिमाग खा रहा है, आप सब मुझे परेशान कर रहे हैं। अगर तनाव से मेरी मौत होती है तो इसकी जिम्मेदारी आप पर होगी। दरवाजा खोलिए, मैं जा रहा हूं, अगर आप चाहते हैं तो मुझे गिरफ्तार करिए।'

'थोड़े दुख और गम के साथ वीडियो बना रहा'

आगे आज बनाए इस वीडियो में उन्होंने कहा, 'दोस्तों ये वीडियो मैं थोड़ा दुख और थोड़ी हैरानी, थोड़ा गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं। अपने भाइयों-बहनों और छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद, जिसमें कि मेरा 11 किलो शरीर खत्म हो चुका है, मसल्स चले गए हैं, बाकी अंग और दिमाग भी कभी न ठीक होने वाले नुकसान की कगार पर पहुंच चुके हैं। वो भी लद्दाख की कड़कती ठंड से दिल्ली की तपती धूप में बैठकर ये सब करने के बाद क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा, कि मेरा अनशन कितना पवित्र था। मैंने तोड़ा तो किसके हाथों तोड़ा, उसके हाथों क्यों तोड़ा, इसके हाथों क्यों नहीं तोड़ा। क्या डील हुआ, क्या सौदा हुआ, ये सब मुझे जवाब देना होगा।'

'डील के आरोपों से आहत हुए वांगचुक'

आगे उन्होंने कहा, ‘मैं कल से अब तरल लिक्विड फूड ले रहा हूं, तो थोड़ी सी शरीर में जान आई है। बदकिस्मती से वो जान मुझे इसमें देनी पड़ रही है, बड़े दुख के साथ कह रहा हूं। मगर सुबह से बहुत से लोग मुझे फोन करके या पोस्ट दिखाकर कह रहे हैं कि आप पर बहुत सवाल उठाए जा रहे हैं, आपने इनसे क्यों अनशन तुड़वाया, केंद्रीय मंत्रियों से क्यों अनशन तुड़वाया, किसी और से क्यों नहीं तुड़वाया। क्या डील हुई है, क्या सौदा हुआ है। क्या अब मुझे इन सब बातों का जवाब देना होगा।’

सोनम बोले- 'धिक्कार है ऐसे देश पर...'

वांगचुक ने आगे कहा, 'अगर मुझे सौदा करना होता या डील करना होता तो क्या मैं 26 दिन भूखे रहता, कितनों ने सौदे किए हैं आपने देखा होगा, तो वो इस तरह से डील करते हैं। क्या मैं आलीशान एयरकंडीशंड कमरे में बैठकर डील नहीं कर सकता था। मुझे यहां दिल्ली की गर्मी में बाहर रोड साइड में बैठकर डील करना पड़ता। धिक्कार है ऐसे देश पर जिसमें ऐसे दिमागों की उपज होती है, जिनसे ऐसे नीच ख्यालात निकलते हैं।'

'मैं केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहता था'

वहीं एक अन्य वीडियो में उन्होंने अपना अनशन तोड़ने की जानकारी देते हुए कहा कि ‘मैं केवल केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अपना अनशन नहीं तोड़ना चाहता था। इसीलिए मैंने अनुरोध किया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के ज्यादा से ज्यादा सांसद, CJP के हमारे छात्र नेता और लद्दाख से आए नेता भी इसमें शामिल हों, ताकि मैं उनकी मौजूदगी में अपना अनशन तोड़ सकूं। हालांकि मुझे किसी से नहीं मिलने दिया गया’