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Delhi Transport & Protests: सुप्रीम कोर्ट ने दिए आदेश, सुरक्षा के साथ आम नागरिकों की सुविधाओं का भी रखा जाए ध्यान

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर पूरी रोक नहीं लगाई जाएगी। कोर्ट ने सेवाओं के नियमन के निर्देश दिए हैं।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर मेट्रो ट्रेनों और रेलवे सेवाओं की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने अधिकारियों से कहा है कि वे सेवाओं को पूरी तरह ठप करने के बजाय उचित नियमन और नियंत्रित तरीके से संचालित करें, ताकि आम यात्रियों को न्यूनतम असुविधा का सामना करना पड़े।

⚖️ पूरी रोक और नियमन में अंतर, आनुपातिकता के सिद्धांत पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल उठाया कि क्या संभावित प्रदर्शन को देखते हुए मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख ट्रेनों की आवाजाही को पूरी तरह रोकना एक आनुपातिक (Proportional) कदम है। CJI ने 'मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करने' की बात कहते हुए प्रशासनिक कदमों की समीक्षा करने को कहा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार इन चिंताओं पर विचार करेगी और प्रतिबंधों की समीक्षा कर उनमें आवश्यक बदलाव करेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आवाजाही से जुड़े फैसलों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि यात्रियों को पहले से जानकारी मिल सके।

🚆 यात्रियों की सुविधा और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी पर फोकस

अदालत ने कहा कि यदि कुछ घंटों के लिए सुरक्षा कारणों से पाबंदियां जरूरी भी हों, तो उसकी अग्रिम सूचना नागरिकों को मिलनी चाहिए ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। बैरिकेडिंग और रास्तों को बंद करने की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता बरतने की बात कही गई है, ताकि महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और मरीज अनावश्यक रूप से परेशान न हों। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों के दैनिक जीवन और सार्वजनिक परिवहन का लाभ उठाने के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।