पंचतत्व में विलीन हुए जंगबीर, हजारों की संख्या में उमड़े जनमानस ने दी भावभीनी विदाई
भिवानी।
“जंगबीर सिंह अमर रहें” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, जंगबीर सिंह तेरा नाम रहेगा” के गगनभेदी नारों से वातावरण गुंजायमान रहा, जब पूर्व सांसद एवं पूर्व सैनिक चौधरी जंगबीर सिंह की अंतिम यात्रा उनके निज निवास पंघाल भवन से प्रारंभ हुई। भारी जनसैलाब के साथ अंतिम यात्रा उनकी जन्मस्थली एवं कर्मस्थली तोशाम पहुंची। परमसंत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज की पावन दृष्टि के समक्ष उनके सुपुत्र कमल प्रधान व डॉ. हरिकेश पंघाल तथा पौत्र डॉ. मानव पंघाल ने मुखाग्नि दी।
अंतिम यात्रा में समाज का हर तबका शामिल हुआ। राजनीति,शिक्षा, अध्यात्म, विज्ञान, वाणिज्य, कला, साहित्य एवं खेल जगत की अनेक हस्तियों ने उपस्थित होकर उन्हें अंतिम विदाई दी। किसानों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आमजन की भारी भीड़ ने अपने प्रिय नेता को नम आंखों से विदा किया।
चौधरी जंगबीर सिंह का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक रहा। 1 मार्च 1941 को तोशाम तहसील के गांव खड़कड़ी माखवान में जन्मे जंगबीर सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा गांव व तोशाम में प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा के लिए हिसार व बीकानेर में अध्ययन किया। देशभक्ति से प्रेरित होकर उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर लगभग सात वर्षों तक सेवा की और 1962 के भारत-चीन तथा 1965 के भारत-पाक युद्ध में अग्रिम पंक्ति में रहकर अदम्य साहस का परिचय दिया।
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति के माध्यम से जनसेवा का मार्ग चुना। हरियाणा गठन के बाद हुए चुनावों में उन्होंने तोशाम क्षेत्र से कई बार चुनाव लड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल व उनके परिवार के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले किए। 1991 में वे भिवानी लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए और क्षेत्र की आवाज को संसद में बुलंद किया। आपातकाल के दौरान उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता न करते हुए लगभग 19 माह से अधिक समय तक जेल में रहकर संघर्ष किया। किसान आंदोलनों व जनसंघर्षों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
अंतिम संस्कार से पूर्व जिला प्रशासन की ओर से तोशाम के तहसीलदार ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। किसान सभा, वामदल, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ, मुस्लिम लीग छात्र संघ एवं पिछड़ा वर्ग संगठन सहित विभिन्न संगठनों ने अपने-अपने तरीके से उन्हें अंतिम सलामी दी। पूर्व सैनिक संघ ने उन्हें तिरंगे में लपेटकर 1962 और 1965 के युद्धों में उनकी वीरता को नमन किया।
उनका अंतिम संस्कार आर्य समाज एवं राधास्वामी मत पद्धति के अनुसार किया गया। जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आर्य समाज की विधि अपनाई गई, वहीं परमसंत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने पवित्र राधास्वामी मंगलाचरण गाकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
चौधरी जंगबीर सिंह 27 मार्च 2026 को 85 वर्ष की आयु में गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस लेकर पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके निधन से भिवानी सहित पूरे हरियाणा में शोक की लहर है। वे अपने पीछे संघर्ष, सेवा और सिद्धांतों से भरा एक प्रेरणादायी जीवन छोड़ गए हैं।उनकी अंतिम यात्रा में परमसंत हुजूर कँवर साहेब जी महाराज,महिला एवं बाल कल्याण मंत्री श्रुति चौधरी,पूर्व सांसद चौ कुलदीप बिश्नोई,बिहार से राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद संजय यादव,युवा नेता दिग्विजय चौटाला,विधायक रणधीर पनिहार,विधायक घनश्याम सर्राफ,विधायक सुनील सतपाल सांगवान,पूर्व विधायक शशि रंजन परमार,पूर्व विधायक रण सिंह मान,पूर्व विधायक सोमबीर श्योरण,पूर्व विधायक सोमबीर सांगवान, पूर्व विधायक रामकिशन फौजी,जिला कांग्रेस के प्रधान अनिरुद्ध चौधरी,प्रदीप गुलिया जोगी ,दादरी जिला कांग्रेस के प्रधान सुशील धानक,कामरेड इंद्रजीत,कामरेड ओमप्रकाश,तोशाम के सरपंच राजेश कुमार,पंघाल खाप के प्रधान दलजीत पंघाल, बाबा चरण दास,नंदकिशोर अग्रवाल,ब्रिगेडियर सत्यव्रत श्योराण संजय बिश्नोई एसडीएम महावीर प्रसाद हरेंद्र श्योराण जेल सुपरिंटेंडेंट कपिल शर्मा एसडीएम,कांग्रेसी नेता संदीप सिंह,परमजीत मद्धू,रज्जू अहलावत,सांसद धर्मबीर के पुत्र मोहित चौधरी,जितेंद्रनाथ,नरेश तंवर,ब्रह्मानंद एडवोकेट,बार काउंसिल के प्रधान संदीप तंवर बार काउंसिल के पूर्व प्रधान सत्यजीत पिलानिया,जोगिंदर तंवर,देवेंद्र सोढ़ी,कर्नल मंगल सिंह,छात्र संघ के पूर्व प्रधानों में संपुर्ण सिंह,विजय मोटू,सरवर सिंह, बलवान सिंह,रतनपाल पहाड़ी और बलवान सिंह ,राजू मान,जितेंद्र भोलू,सूबे सिंह आर्य नरेश जांगड़ा चेयरमैन, युद्धबीर चेयरमैन,द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश कोच,जिला पार्षद प्रदीप तंवर,तोशाम के पूर्व सरपंच देवराज तोशामिया सहित अनेकों सामाजिक और राजनैतिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।