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Stock Market Crash News Updates: क्यों डूबा अमेरिकी शेयर बाजार और AI कंपनियों में अचानक भारी बिकवाली से क्या है खतरा?

भारत में शेयर बाजार ने 20 लाख करोड़ कमाए, वहीं अमेरिकी बाजार AI शेयरों में भारी गिरावट से 5.7 ट्रिलियन डॉलर (563 लाख करोड़ रुपये) डूब गए। जानिए कारण।
 

भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी दीवाली का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, क्योंकि वहां लाखों की संख्या में भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं। लेकिन इस दीवाली से ठीक पहले जहां भारत के शेयर बाजार में ज़बरदस्त तेजी और रौनक देखने को मिली, जिसमें भारतीय निवेशकों ने मात्र 7 कारोबारी दिनों में 20 लाख करोड़ रुपये की कमाई की, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी शेयर बाजार को अब तक के सबसे बड़े झटकों में से एक का सामना करना पड़ा है। शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई। 6 अक्टूबर को अपने ऐतिहासिक शिखर पर पहुँचने के बाद से अब तक अमेरिकी शेयर बाजार की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 5.7 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 563 लाख करोड़ रुपये) की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। बाजार जानकारों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बाजार में बना लंबे समय का उत्साह अब गहरी चिंता में बदल चुका है।

📊 Nasdaq 100 में 2.3 ट्रिलियन डॉलर की ऐतिहासिक गिरावट; 57% कंपनियों के शेयर 20% तक गिरे

नस्डैक सूचकांक और AI कंपनियों का ब्योरा:

  • ऐतिहासिक गिरावट: गुरुवार के कारोबारी सत्र में Nasdaq 100 इंडेक्स से अकेले 2.3 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू साफ हो गई। इंडेक्स में शामिल 57 फीसदी कंपनियों के शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से कम से कम 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं।

  • बियर मार्केट से भी बुरा हाल: यह बिकवाली मार्च 2022 में बाजार के 'बियर मार्केट' (मंदी का दौर) में जाने के दौरान दर्ज स्तर से भी अधिक भयावह साबित हुई है।

  • रिटर्न को लेकर संशय: बाजार में तबाही की सबसे बड़ी वजह AI कंपनियों की अत्यधिक ऊंची वैल्यूएशन (Valuation), कंपनियों पर बढ़ता कर्ज और AI पर किए जा रहे खरबों डॉलर के निवेश के बदले पर्याप्त रिटर्न (कमाई) न मिलने की अनिश्चितता है।

🏛️ राजनीतिक बदलाव और नियमों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता; हेज फंड्स ने बढ़ाया बिकवाली का दबाव

अमेरिकी चुनाव व डेटा सेंटर्स पर असर:

  • डेमोक्रेट्स की जीत और पाबंदियां: अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की जीत ने वॉल स्ट्रीट के निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इससे बड़े डेटा सेंटर (Data Centers) बनाने और उनके विस्तार पर सख्त पर्यावरणीय तथा रेगुलेटरी पाबंदियों की आशंका गहरा गई है, जो कि AI उद्योग के विकास की रीढ़ हैं।

  • पैनिक सेलिंग (Panic Selling): गिरावट के इस दौर में हेज फंड्स, लिवरेज्ड ट्रेडर्स और ऑटोमेटेड ट्रेडिंग एल्गोरिदम ने बिकवाली का दबाव कई गुना बढ़ा दिया। इसके अलावा, आम खुदरा निवेशकों (Retail Investors) ने भी 'बाय द डिप' (गिरावट पर खरीदारी) करने के बजाय अपने शेयर बेचकर बाहर निकलना ही सुरक्षित समझा।

🔮 अब सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा; वास्तविक कमाई और मुनाफे पर रहेगा निवेशकों का फोकस

भविष्य की राह और विशेषज्ञों की राय:

  • निवेश की रफ्तार होगी धीमी: वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि AI सेक्टर में बिना सोचे-समझे पैसे झोंकने की रफ्तार अब पहले की तुलना में धीमी पड़ सकती है।

  • मुनाफे पर नजर: निवेशक अब कंपनियों के बड़े-बड़े दावों और वादों के बजाय बैलेंस शीट में दर्ज वास्तविक राजस्व और शुद्ध मुनाफे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आने वाले समय में AI टेक दिग्गजों का प्रदर्शन और उनके निवेश पर मिलने वाला असली रिटर्न ही अमेरिकी शेयर बाजार की आगे की दिशा तय करेगा।