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वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का मौका: इन 3 स्टॉक्स पर रखें नज़र

भारत में वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट 6.51 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान। WPIL, EMS और Welspun Enterprises जैसी कंपनियों में निवेश के अवसरों का विश्लेषण।

 

भारत में अब निवेश का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है. बढ़ते शहरीकरण, नई इंडस्ट्रीज के विस्तार तथा डेटा सेंटर्स के जाल के बीच पानी की किल्लत एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. इस संकट से निपटने के लिए सरकार जल आपूर्ति से लेकर वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट तक के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है. जल जीवन मिशन, अमृत तथा नमामि गंगे जैसी बड़ी योजनाओं के दम पर भारत का वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार जल्द ही 6.51 लाख करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को छूने वाला है. इस ऐतिहासिक निवेश का सीधा फायदा शेयर बाजार की तीन प्रमुख कंपनियों, डब्ल्यूपीआईएल (WPIL), ईएमएस (EMS) और वेल्सपन एंटरप्राइजेज (Welspun Enterprises) को मिलने जा रहा है.

बदल रहा है निवेश का ट्रेंड

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के आंकड़े इस सेक्टर के सुनहरे भविष्य की गवाही देते हैं. वित्त वर्ष 2020 से 2024 के बीच देश में वाटर तथा वेस्टवॉटर मार्केट का आकार 3.95 लाख करोड़ रुपये था. अब ऐसा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 से 2029 के बीच यह बाजार छलांग लगाकर 6.31 से 6.51 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच जाएगा. ऐसे में पानी से जुड़ी इन कंपनियों के पास आने वाले कई सालों तक काम की कोई कमी नहीं रहने वाली है.

विदेशी प्रोजेक्ट्स से डब्ल्यूपीआईएल को भारी मुनाफा

पंप बनाने से लेकर टर्नकी वाटर सॉल्यूशंस मुहैया कराने वाली कंपनी डब्ल्यूपीआईएल का कारोबार भारत के साथ-साथ इटली, साउथ अफ्रीका तक फैला है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी फंड मिलने में देरी से घरेलू बाजार में थोड़ा असर दिखा, लेकिन विदेशी प्रोजेक्ट्स ने इसकी शानदार भरपाई कर दी. इसका नेट प्रॉफिट बढ़कर 199.7 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी के पास 4,936 करोड़ रुपये के पुराने ऑर्डर हैं, जबकि साउथ अफ्रीका में नए अधिग्रहण से इसे 3,000 करोड़ रुपये का काम अलग से मिला है. शेयर बाजार में इसका भाव फिलहाल 493.55 रुपये के आसपास है.

ईएमएस के पास मजबूत ऑर्डर बुक

ईएमएस एक ऐसी इंजीनियरिंग कंपनी है, जिसका करीब 75 फीसदी बिजनेस पूरी तरह से पानी के प्रोजेक्ट्स पर टिका है. यह मुख्य रूप से नमामि गंगे जैसी सरकारी योजनाओं पर फोकस करती है. पिछले वित्त वर्ष में पेमेंट में देरी के कारण इसके रेवेन्यू में 24 फीसदी की गिरावट जरूर आई, लेकिन कंपनी के पास इस वक्त 1,837 करोड़ रुपये का सॉलिड ऑर्डर बुक मौजूद है. मैनेजमेंट इसे महज एक अस्थायी समस्या मान रहा है. इसका शेयर 419.90 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

वेल्सपन एंटरप्राइजेज का जलवा

वाटर बिजनेस में सबसे बड़ी बाजी वेल्सपन एंटरप्राइजेज मारती दिख रही है. मुंबई के धारावी में देश का पहला मल्टी-स्टोरी वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट यही कंपनी बना रही है. इसके कुल ऑर्डर बुक का 70 फीसदी हिस्सा सिर्फ पानी के प्रोजेक्ट्स से आता है. इस समय कंपनी के पास 13,817 करोड़ रुपये के विशाल ऑर्डर हैं. बीते वित्त वर्ष में इसका शुद्ध मुनाफा 11 फीसदी उछलकर 393 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसका शेयर 572.45 रुपये के स्तर पर मजबूत बना हुआ है.