Bike Care Tips: बाइक का माइलेज और पिकअप बढ़ाएगा बस एक छोटा सा काम

क्या आपकी बाइक कम माइलेज दे रही है? गंदा एयर फिल्टर हो सकता है इसकी वजह। जानें एयर फिल्टर बदलने का सही समय और इंजन को सुरक्षित रखने के आसान टिप्स।

 
पेपर एयर फिल्टर बनाम फोम फिल्ट

बाइक को सही और स्मूथ तरीके से चलाने के लिए सिर्फ पेट्रोल ही काफी नहीं होता, बल्कि साफ हवा भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है. यही काम करता है एयर फिल्टर. ये बाहर से आने वाली हवा को फिल्टर करके इंजन तक पहुंचाता है, ताकि उसमें मौजूद धूल, मिट्टी और छोटे कण अंदर न जा सके. जब इंजन तक साफ हवा पहुंचती है, तो पेट्रोल और हवा का मिश्रण सही बनता है, जिससे बाइक की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है और माइलेज भी अच्छा मिलता है.

लेकिन अगर एयर फिल्टर गंदा या जाम हो जाए, तो इंजन को पर्याप्त मात्रा में हवा नहीं मिल पाती. इसका सीधा असर बाइक की ताकत और माइलेज पर पड़ता है. फ्यूल सही तरीके से नहीं जलता, जिससे इंजन की कार्यक्षमता कम हो जाती है और राइडिंग एक्सपीरियंस भी खराब होने लगता है.

एयर फिल्टर खराब होने के कुछ संकेत

एयर फिल्टर खराब होने के कुछ संकेत आसानी से पहचाने जा सकते हैं. जैसे बाइक का माइलेज कम होना, पिक-अप कमजोर पड़ना या एक्सेलरेटर देने पर धीमा रिस्पॉन्स मिलना. इसके अलावा इंजन से असामान्य आवाजें आना या साइलेंसर से काला धुआं निकलना भी खराब फिल्टर की निशानी हो सकती है. अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए, तो ये स्पार्क प्लग और इंजन के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. लंबे समय तक गंदे फिल्टर के साथ बाइक चलाने से इंजन के अंदर गंदगी जमा हो सकती है, जिससे उसकी उम्र घट जाती है.

पेपर एयर फिल्टर

आजकल अधिकतर बाइक्स में पेपर एयर फिल्टर का इस्तेमाल होता है, जिन्हें साफ करने के बजाय बदलना ही बेहतर माना जाता है. वहीं, कुछ पुरानी बाइक्स में फोम फिल्टर होते हैं, जिन्हें धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, सिर्फ झाड़कर या हवा से साफ करना पूरी तरह प्रभावी नहीं होता, इसलिए ज्यादा गंदे फिल्टर को बदलना ही सही ऑप्शन है.

कब बदलना चाहिए एयर फिल्टर

जहां तक बदलने की बात है, आमतौर पर एयर फिल्टर को हर 10,000 से 15,000 किलोमीटर के बीच बदलना चाहिए. लेकिन अगर आप धूल या प्रदूषण वाले इलाकों में ज्यादा बाइक चलाते हैं, तो 5,000 किलोमीटर पर इसकी जांच कराना जरूरी है. सही समय पर एयर फिल्टर बदलने से बाइक की परफॉर्मेंस और इंजन की लाइफ दोनों बेहतर बनी रहती हैं.